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मंदिरों की जमीन का अधिग्रहण रोकने से केरल हाईकोर्ट का इनकार, कहा- भगवान हमें कर देंगे माफ ….

तिरुवनंतपुरम। केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कोल्लम में पूजा स्थलों पर राष्ट्रीय राजमार्ग विकास के लिए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग विकास के अलाइनमेंट को नहीं बदला जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा, “राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए, यदि धार्मिक संस्थान प्रभावित होते हैं, तो भगवान हमें माफ कर देंगे। भगवान याचिकाकर्ताओं, अधिकारियों और यह फैसला लेने वालों की भी रक्षा करेंगे। भगवान हमारे साथ रहेंगे।”

हाईकोर्ट ने केरल के कोल्लम जिले के उमयनेल्लूर गांव से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 66 के संशोधित अलाइनमेंट के खिलाफ दायर याचिकाओं पर विचार करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण  ने कोल्लम के कुछ गांवों में धार्मिक संस्थानों को बचाने के लिए NH-66 के अलाइनमेंट में कुछ बदलाव लाने के राज्य सरकार के सुझाव की उपेक्षा की।

हाईकोर्ट ने मलयालम गीतकार श्रीकुमारन थम्पी के गीत “ईश्वर पृथ्वी में, आकाश में, खंभों में और जंग में, ईश्वर सर्वव्यापी है” का हवाला दिया। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अनावश्यक और तुच्छ मामलों पर राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए भूमि अधिग्रहण में हस्तक्षेप नहीं करेगा। अदालत ने कहा, “अगर अदालतें इस तरह से हस्तक्षेप करती हैं, तो राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास पूरी तरह से ठप हो जाएगा।”

अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग विकास के लिए भूमि अधिग्रहण करते समय पूजा स्थलों को बाहर करने के राज्य सरकार के निर्देश को लागू करना हमेशा व्यावहारिक नहीं था। हाईकोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास देश के विकास के लिए आवश्यक है और भूस्वामियों को भूमि अधिग्रहण में सहयोग करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा, “अदालत उनकी भावनाओं को समझ सकती है। लेकिन विकास परियोजनाओं को नागरिकों के एक वर्ग की कठिनाई के बिना लागू नहीं किया जा सकता है।”

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