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भारत की प्राचीन विधा – योग से मिलता है स्वास्थ्य और सुख …

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष

योग भारत की प्राचीन विधा है। हमारे अनेक ग्रंथ जो योग पर लिखे गए हैं। उनमें से अधिकांश में आध्यात्मिक उन्नति के बारे में ही उल्लेख किया गया है। पतंजलि योग शास्त्र, हठयोग प्रदीपिका, व अन्य अनेक ग्रंथ योग पर लिखे गए हैं। हमारे ऋषि मुनियों ने ईश्वर प्राप्ति के लिए योग का मार्ग उत्तम माना है। ईश्वर प्राप्ति को ही केंद्र मानकर इन ग्रंथों की रचना हुई। इसी कारण यह विधा केवल साधु महात्माओं के लिए ही मानी जाने लगी। और साधारण जन मानस इससे अलग ही रहा। धीरे धीरे योगासन, प्राणायाम का सरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए प्रचार होने लगा। जिसका लाभ साधु महात्मा के अलावा गृहस्थ जीवन को भी मिला। आज बड़े, बूढ़े, जवान, बालक, सभी योग व प्राणायाम से आरोग्य को प्राप्त कर स्वास्थ्य व सुख एकत्रित कर रहे हैं।

आज के तनावपूर्ण माहौल में भारतीय योग विद्या की विश्व के सभी देशों में लोकप्रियता बढ़ी है”। जिसके चलते 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में इसे मनाया जाने लगा है। जिसका श्रेय कहीं न कहीं योग गुरु बाबा रामदेव को भी जाता है। जिन्होंने योग के प्रचार प्रसार को देश के बाहर विदेश तक में फैलाया व योग अभ्यास व इससे होने वाले फायदों को बताया।

यह एक वैज्ञानिक विधि है, योग व प्राणायाम शरीर को रोगों से मुक्त रख सकने में बहुत मददगार हैं• आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मूल समस्या आज सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य नहीं है,अपितु मानसिक तनाव भी अपने चरम पर है। मन को स्वस्थ्य रखना शरीर को स्वस्थ्य रखने की प्रथम सीढ़ी है। जो कि हमें योग व प्राणायाम से मिलती है। योग से मानसिक तनाव में कमी आती है।  योग का अर्थ होता है जोड़ना, अर्थात शरीर में स्वास्थ्य व शांति को जोड़ना।

 

©देवन तिवारी (देवन)
प्रवक्ता नेहरू कॉलेज,महोबा, उत्तर प्रदेश

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