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भारत ने चीन के साथ एक समय में एक मुद्दे को हल करने का लिया फैसला…

नई दिल्ली। भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 18 ऐसे जगहों की पहचान की है जहां सबसे ज्यादा संघर्ष होता है। भारत ने सीमा संबंधी सभी विवादास्पद मुद्दों को एक साथ उठाने के बजाए चीन के साथ एक समय में एक मुद्दे को हल करने के लिए कदम उठाने का फैसला किया है।

 

जिस तरह 31 जुलाई को 12वीं कोर कमांडर की बैठक में पूर्वी लद्दाख में गोगरा पर भारतीय सेना और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के गतिरोध को सुलझा लिया गया था, उसी तरह भारत पीएलए को अनुमति नहीं देते हुए शेष सभी मुद्दों को चीन के साथ एक-एक करके उठाने के लिए तैयार है। आपको बता दें कि भारत ने 3,488 किलोमीटर की वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ यथास्थिति को एकतरफा रूप से बदलने के लिए चीन का लगातार विरोध किया है।

 

भारत और चीन के बीच जारी कमांडर स्तरीय वार्ता में आगे कोंगका ला, डेमचोक के पास हॉट स्प्रिंग्स में गतिरोध को हल करना और देपसांग बुलगे में गश्त के अधिकारों की बहाली  पर चर्चा होनी है। भारत ने एलएसी पर 18 ऐसे जगहों की पहचान की है, जहां दोनों देशों के बाच गतिरोध जारी है। एलएसी पर शांति बहाल करने से पहले दोनों सेनाओं के बीच इन जगहों पर जारी गतिरोध को हल करने की आवश्यकता है। एक पूर्व विदेश सचिव ने कहा, “हम एक-एक करके प्रत्येक प्वाइंट को उठाने का इरादा रखते हैं ताकि दोनों पक्ष अपने रुख के समर्थन में तर्कों के बारे में स्पष्ट हों।”

 

दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों का भविष्य सीमा मुद्दों को हल करने में लगने वाले समय पर निर्भर करेगा। मई 2020 में, PLA ने 1993-1996 के द्विपक्षीय सीमा समझौते को नहीं मानते हुए पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो, गालवान, गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स के उत्तरी तट पर अतिक्रमण के साथ यथास्थिति को सैन्य रूप से बदलने का फैसला किया। पूर्वी लद्दाख में 1597km LAC पर 1959 लाइन (तत्कालीन चीनी पीएम झोउ एन-लाई द्वारा प्रस्तावित) को पहले ही खारिज कर दिया गया था। 15 जून, 2020 को गालवान में स्थिति तब और बिगड़ गई, जब पीएलए ने गश्त प्वाइंट 14 पर भारतीय सेना के साथ युद्ध करने की कोशिश की। इस दौरान कर्नल संतोष बाबू सहित 20 भारतीय सैनिकों शहीद हो गए।

 

पीएलए और भारतीय सेना दोनों एलएसी पर तैनात हैं। जून 2021 में सैन्य अभ्यास के लिए पूर्वी लद्दाख में लाए गए पीएलए सैनिक गश्ती करते हैं और अपने-अपने ठिकानों पर वापस चले जाते हैं। भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने पूर्वी लद्दाख में सर्दियों की शुरुआत से पहले सैनिकों की तैनाती की समीक्षा की है। राष्ट्रीय सुरक्षा योजनाकारों ने नई दिल्ली से केंद्रीय सेना कमान को मजबूत किया है।

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