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उन्मुखीकरण कार्यक्रम में डीईओ सतीश पांडे ने कहा- सभी मिल-जुलकर संवारेंगे बच्चों का भविष्य …

कोरबा। जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के सेन्हा संकुल में एसएमडीसी तथा एसीके सदस्यों की उन्मुखीकरण कार्यशाला संपन्न। कार्यशाला में जिला शिक्षा अधिकारी सतीश पांडे ने कहा जैसे एक खेत जैसे एक किसान अपने खेत में धान बोता है तथा पूरे साल भर उसकी रखरखाव और देखभाल करता है जिससे खेत की अधिक पैदावार होती है।

उसी तरह विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों की देखरेख करने के लिए एसएमसी तथा एसएमडीसी का गठन किया गया है। शाम को स्कूल की छुट्टी होने के बाद स्कूल एक अनाथ की तरह हो जाता है। फिर उसमें शरारती तत्वों का अड्डा बन जाता है। अतः हमारे शासकीय विद्यालयों की देखरेख के लिए हमारे गांव के एसएमसी तथा एसएमडीसी के सदस्यों को आगे आने की जरूरत है। जो विद्यार्थी स्कूल नहीं आते या फिर पढ़ाई छोड़ चुके हैं या फिर घर से स्कूल आने के लिए निकलते हैं और स्कूल नहीं पहुंचकर कहीं अन्य जगह चले जाते हैं या दीर्घ अवकाश में स्कूल को छोड़कर कहीं और चले जाते हैं।

ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षा तथा विद्यालय की मूल धारा से जोड़ने के लिए शिक्षकों एवं अभिभावको ग्रामीण तथा एसएमडीसी एवं एसएमसी के सदस्यों की अहम भूमिका हो जाती है। साथ ही कोई विद्यार्थी विद्यालय में आता है तो अनुशासनहीनता बरतता है तो उसके संबंध में भी एसएमडीसी के सदस्यों तथा शिक्षकों के द्वारा अनुशासन बनाने के लिए सहयोगात्मक कार्य करने की आवश्यकता है। यदि विद्यार्थी को पढ़ने लिखने में समझ में नहीं आता है। तो उसके कारणों को जानना तथा शिक्षकों से चर्चा कर उसका निदान करने का उपाय करना।

विद्यार्थियों के अंतर्निहित गुणों के विकास में एसएम डी सी तथा एसएमसी के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। साथ ही साथ विद्यार्थियों के अंदर कौशल विकास जैसे सिलाई कढ़ाई, कारपेंटर ,चटाई निर्माण ,बांस के कार्य जैसे अनेक कार्यों को विद्यार्थियों को सिखा कर उनके जीवन यापन करने के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। साथ ही यदि कोई शिक्षक स्कूल नहीं आता है या फिर स्कूल आता है तो अध्यापन कार्य नहीं कराता है या फिर अध्यापन कार्य कराता है तो वह यदि बच्चों को समझ नहीं आता है तो इसके निराकरण के लिए एस एम डी सी एवं एस एम सी के सदस्य, शिक्षक तथा प्राचार्य आपस में बैठकर चर्चा कर समस्या का निराकरण कर सकते हैं।

विद्यालय में अधोसंरचना के विकास के लिए क्या क्या आवश्यकता है इसके संबंध में प्रशासन स्तर पर प्रयास किया जा सकता है। साथ ही साथ जिस तरह हम गांव में गणेश चतुर्थी , दुर्गा पूजा जैसे अनेक उत्सव में आर्थिक एवं शारीरिक सहयोग करते हैं उसी तरह से विद्यालय जो एक मंदिर है जिसमें मां सरस्वती विराजमान होती है तथा हमारे ही गांव के बच्चों की भविष्य जहां निर्मित होती है तो इस तरह से विद्या की मंदिर के विकास के लिए हम गांव में सामुदायिक सहभागिता से योगदान क्यों सकते हैं।

विद्यालय की स्वच्छता विद्यालय एवं गांव की स्वच्छता, वृक्षारोपण, बच्चों के अंदर संस्कारों की विकास, सांस्कृतिक विकास, खेलकूद तथा ऑनलाइन पढ़ाई के लिए जिन विद्यार्थियों के पास मोबाइल नहीं है उनके सहयोग के लिए गांव में व्यवस्था करने का कार्य गांव के सरपंच अन्य जनप्रतिनिधि तथा एसएमडीसी के सदस्यों के माध्यम से एवं शिक्षकों के मार्गदर्शन से किया जा सकता है। गांव के पढ़े लिखे व्यक्तियों का एजुकेशन क्लब बनाकर छुट्टी के बाद विद्यार्थियों के लिए गांव में अध्ययन अध्यापन के लिए एक अच्छा वातावरण बनाया जा सकता है।

मास्टर ट्रेनर राकेश टंडन ने एस एम सी एवं एसएमडीसी के सदस्यों का विद्यालय में सहभागिता के संबंध में चर्चा कर जानकारी प्रदान किया। प्रभा साव द्वारा विद्यालय में विद्यार्थियों की सभागिता के संबंध में चर्चा किया। मार्गदर्शक सर्वेश सोनी द्वारा विद्यालय में शिक्षकों की भूमिका पर चर्चा की गई। एम पी पटेल, गीता देवी हिमधर तथा मधुलिका दुबे ने अपने विद्यालय में किस तरह स्वयं प्रयास कर सामुदायिक सहभागिता के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया इस पर चर्चा किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत मधुलिका दुबे द्वारा प्रेरणा गीत, गीता देवी हिमधर द्वारा सरस्वती वंदना, रुपेश चौहान द्वारा राजकीय गीत अरपा पैरी के धार का गायन से किया गया। कार्यक्रम में लगभग 135 एसएमसी तथा एसएमडीसी के सदस्य एवं ग्रामीण जन उपस्थित थे। पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के बीआरसी बी पी कश्यप, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेन्हा के प्राचार्य आईपी दीक्षित, एसएमडीसी तथा एसएमसी के सदस्य गण पैकरा जी। मरकाम जी, पात्रे जी, अजय जयसवाल जी अफरोज खान जी उपस्थित थे। सभी ने विद्यालय के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की।

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