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राष्ट्रपति चुनाव में 2 फीसदी वोट का जुगाड़ कैसे करेगी भाजपा, इन दलों से होगी उम्मीद ….

नई दिल्ली। राष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग ने तारीख का ऐलान कर दिया है। 18 जुलाई को नए राष्ट्रपति के चयन के लिए मतदान होगा और जरूरी होने पर 21 जुलाई को गिनती की जाएगी। साफ है कि 21 जुलाई तक देश के नए राष्ट्रपति के नाम का ऐलान हो जाएगा। मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है।

देश के प्रथम नागरिक के चुनाव में यूं तो केंद्र की सत्ता पर काबिज भाजपा की मजबूत स्थिति है, लेकिन विपक्ष को साधने की भी उसे जरूरत पड़ेगी। इसकी वजह यह है कि भाजपा के पास कुल 48.9 फीसदी वोट है और विपक्ष के पास 51.1 फीसदी वोट है।

ऐसे में भाजपा को 2.2 फीसदी के अंतर को खत्म करने के लिए विपक्षी खेमे में सेंध लगानी होगी और एकजुटता को कमजोर करना होगा। माना जा रहा है कि भाजपा ओडिशा की सत्ताधारी पार्टी बीजेडी और आंध्र प्रदेश की सरकार चला रही वाईएसआर कांग्रेस से मदद ले सकती है। इसके अलावा केसीआर की पार्टी टीआरएस से भी समर्थन मांग सकती है। हालांकि उन्होंने जिस तरह से भाजपा के खिलाफ देश भऱ में खेमेबंदी शुरू की है, उससे ऐसा नहीं लगता कि वह एनडीए उम्मीदवार का समर्थन करेंगे। ऐसे में राष्ट्रपति चुनाव में भले ही भाजपा मजबूत स्थिति में है, लेकिन दो फीसदी वोटों का गणित उसे सिरदर्द जरूर दे सकता है।

दरअसल 2017 के राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए कैंडिडेट रहे रामनाथ कोविंद को 65 फीसदी के करीब वोट मिले थे। लेकिन तब से अब तक हालात बिगड़ गए हैं। तब भाजपा की सरकार महाराष्ट्र, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड में भी थी, लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है। मध्य प्रदेश और कर्नाटक में भी हार गई थी, लेकिन बाद में जोड़तोड़ से उसे सरकार बनाने में मदद मिल गई थी।

ऐसे में अब भाजपा को समर्थन जुटाने के लिए कुछ मशक्कत जरूर करनी होगी। हालांकि इसकी काट पार्टी की ओर से ऐसा चेहरा उताकर निकाली जा सकती है, जिसका विरोध करना ही विपक्ष के लिए मुश्किल हो जाए।

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