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अयोध्या में राम मंदिर के विग्रह की किस प्रकार हो प्रतिष्ठा, एक मंच होंगे देशभर के धर्माचार्य…

अयोध्या । रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला के निर्माणाधीन दिव्य मंदिर में किस प्रकार के विग्रह की प्रतिष्ठा हो, इस विषय पर सामूहिक मंथन की घड़ी आ गई है। राम मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद यह पहला अवसर आया है जब चतु: सम्प्रदाय से जुड़े देश भर के मूर्धन्य धर्माचार्य एक मंच पर एकत्र होंगे। यह मौका श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास महाराज के जन्मोत्सव के दौरान 12 जून को आयोजित संत सम्मेलन के जरिए मिलेगा।

ट्रस्ट अध्यक्ष महंत श्रीदास का जन्मोत्सव समारोह फिलहाल चार जून से शुरू हो रहा है। समारोह का अनावरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। मालूम हो कि पांच अगस्त 2020 को राम मंदिर के भूमि पूजन के बाद ट्रस्ट अध्यक्ष महंत श्रीदास जन्माष्टमी मनाने मथुरा गये थे। वहीं 11 अगस्त 2020 को वह कोरोना संक्रमित हो गये। इस कारण वह लंबे समय तक बिस्तर पर ही थे। उनकी बीमारी के कारण 2021 में समारोह स्थगित कर दिया गया था जबकि 2020 में 25 मार्च को ही कोरोना की वैश्विक महामारी के कारण पूरे देश में लाकडाउन घोषित था जिसके कारण सार्वजनिक समारोह नहीं हो सका था। अब दो साल बाद समारोह उस समय होने जा रहा है जबकि रामलला के मंदिर की नींव डाली जा चुकी है और मूल मंदिर के स्ट्रक्चर का पहला पत्थर भी एक जून को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी के हाथों रखा जा चुका होगा।

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत श्रीदास के जन्मोत्सव समारोह का आमंत्रण नरेंद्र मोदी सरकार के केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी सहित कई अन्य मंत्रियों और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक व केशव प्रसाद मौर्य समेत अन्य को भेजा जा चुका है। यह जानकारी मणिराम छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने देते हुए बताया कि समारोह में सम्मिलित होने की सहमति कई लोगों ने दे दी है। इनमें राजनीतिज्ञों के अलावा प्रमुख रूप से मंदिर आंदोलन से जुड़े देश भर के धर्माचार्य है। उन्होंने बताया कि धर्माचार्यों के आवास इत्यादि की व्यवस्थाएं अभी से की जा रही है।

मणिराम छावनी महंत श्रीदास ने बताया जन्मोत्सव समारोह के पहले दिन चार जून को रामकथा के प्रख्यात गायक प्रेमभूषण महाराज की ओर से कथा प्रवचन प्रतिदिन सायं चार बजे से सायं सात बजे तक होगी। इसके पहले प्रात: कलशयात्रा के साथ शोभायात्रा निकाली जाएगी। उन्होंने बताया कि इसी तिथि से अखंड हरिकीर्तन के अलावा चतुर्वेद पारायण भी 12 जून तक चलेगा।

वहीं अनुष्ठान की पूर्णाहुति के अवसर पर 13 जून को भंडारे का आयोजन किया जाएगा। वहीं 12 जून को ही गुरुदेव का पूजन होगा और सायंकालीन बेला में विराजमान भगवान के फूलबंगले की झांकी के साथ सांस्कृतिक संध्या भी आयोजित होगी। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में मंदिर परम्परा के गायकों के अलावा शास्त्रीय संगीतज्ञों का भी जमावड़ा होगा।

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