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किसान संगठन कर रहे गैर-भाजपा दलों के साथ मीटिंग, पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर बनाई यह रणनीति …

नई दिल्ली । संयुक्त किसान मोर्चा ने इन पार्टियों से पंजाब विधानसभा चुनाव की आधिकारिक घोषणा से पहले पंजाब में विभिन्न स्थानों पर राजनीतिक अभियान नहीं चलाने का अनुरोध करने के लिए बैठक रखी है। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे उनके चल रहे आंदोलन पर असर पड़ सकता है।  इस बैठक में हर संगठन का एक किसान नेता शामिल होगा।

कृषि कानूनों को लेकर एक बार फिर पंजाब के 32 किसान संगठन एक मंच पर आ गए हैं।  ये किसान संगठन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को छोड़कर राज्य के विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ चंडीगढ़ में बैठक कर रहे हैं। किसान नेताओं ने सियासी दलों से सवाल करने के लिए आयोजित इस बैठक में भारतीय जनता पार्टी को न्योता नहीं दिया है। किसान नेताओं ने कहा कि भाजपा के सहयोगी दलों को भी इसमें नहीं बुलाया गया है। अन्य सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल होंगे।

पंजाब किसान यूनियन के अध्यक्ष रुलदू सिंह मनसा ने कहा, “यह देश का सबसे बड़ा आंदोलन है और हर कोई हमारा समर्थन कर रहा है। हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी समर्थन मिल रहा है। इसलिए, हम निश्चित रूप से अंत में एक नतीजे पर पहुंचेंगे।”

रिपोर्टों के अनुसार, बैठक चंडीगढ़ के पीपुल्स कन्वेंशन सेंटर में हो रही है और लगभग 11 बजे शुरू हुई है। भारतीय किसान संघ (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने बुधवार को कहा कि केंद्र द्वारा आज घोषित रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि “किसानों के साथ मजाक है।” टिकैत ने ट्विटर पर लिखा, “रबी फसलों के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य किसानों के साथ मजाक है। महंगाई बढ़ रही है लेकिन इसकी तुलना में किसानों के लिए एमएसपी में बढ़ोतरी की दर बहुत कम है। यह बढ़ोतरी पिछले साल की तुलना में कम है। सरकार हमें बताए कि उसने कौन सा फॉर्मूला इस्तेमाल किया है?”

गौरतलब है कि बीते वर्ष नवंबर माह से किसान नए कृषि कानूनों की मांग को रद्द करने को लेकर किसान संगठन दिल्ली की सीमाओं पर धरने पर बैठे हैं। किसानों और केंद्र सरकार के बीच कई दौर की चर्चाएं भी हुई लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है।

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