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कोराना के खौफ के बीच मानवता की मिसालें …

मुंबई {हेमलता म्हस्के } । कोराना विषाणु के भारी खौफ और उसके हो रहे विस्तार के बीच मानवता की सेवा के लिए केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों सहित सम्पूर्ण चिकित्सा जगत की भूमिका तो प्रशंसनीय है ही, इसी के साथ भारतीय सेना और पुलिस का कार्य भी देश को कोराना मुक्त करने के लिए अतुलनीय है। इन सभी के साथ देश के अनगिनत लाखों सेवाभावी लोगों की भूमिका भी कम नहीं है, जो साधनहीन होते हुए भी पूरी संवेदना और जिम्मेदारी के साथ अपनी आहुति डालने में पीछे नहीं हैं। केंद्र व राज्य सरकारों सहित अनेक राजनीतिक, धार्मिक, आर्थिक, खेल व सामाजिक संगठन भी कोराना प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं।

नई सदी में सबसे ज्यादा भयावह महामारी के रूप में कुख्यात हो गए कोरोना विषाणु से पीड़ित सैकड़ों देशों में भारत जैसे बड़ी आबादी और कम संसाधनों वाले देश में मानवता की ऐसी ऐसी मिसालें सामने आ रही हैं, जो यह उम्मीद जगा रही है कि हमारा देश मौजूदा संकट से जरूर उबर जाएगा और भविष्य में नई ताकत हासिल कर अपनी नई पीढ़ियों के लिए अभूतपूर्व मिसाल कायम करेगा, क्योंकि जैसे जैसे लॉकडाउन की अवधि बढ़ती जा रही है, लोग अनुशासित होते हुए कोरोना से जूझने के लिए खुद को तैयार करते हुए दिखाई पड़ रहे हैं।

यह सच्चाई है कि दुनिया के विभिन्न देशों की तरह अपने देश में लोगों के कोरोना से संक्रमित होने की रफ्तार फिलहाल कम नहीं हो रही है। कोराना विषाणु से अब तक 500 से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें 66 लोग ठीक हुए हैं तो 17 लोगों की मौत भी हो चुकी है। मरने वालों में बूढ़े, नौजवान और बच्चे सभी शामिल हैं। कोरोना की विपदा से मुक्ति के लिए भारत सरकार ने 3 सप्ताह तक लॉकडाउन की घोषणा की है।

लॉकडाउन के दौरान स्कूल, कॉलेज, मॉल, कारखाने और दुकानों सहित सभी व्यापारिक संस्थान बंद हो गए हैं। कुछ पेशों को छोड़ कर ज्यादातर पेशेवर लोग घरों में बंद हो गए हैं। इसी के साथ काफी बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूर रोजगार से वंचित हो गए हैं और उनके सामने भुखमरी की नौबत आ गई है। इनके लिए खाने-पीने के सामान की व्यवस्था कराने के साथ संक्रमित होने वाले लोगों की जांच व इलाज के लिए बड़े पैमाने पर चिकित्सीय सुविधाएं मुहैया कराने की चुनौतियां बढ़ गई हैं। और यह काम अकेले सरकारों के बस की बात नहीं है।

केंद्र सरकार सहित विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा असहाय लोगों के हित में अनेक घोषणाएं की गई हैं। घोषणाओं का लाभ जरूरतमंद तक पहुंचे यह भी अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। सरकारी अधिकारी, कर्मचारी सहित पुलिस, सेना, अर्धसैनिक बलों के जवानों के साथ बड़ी संख्या में डॉक्टर, नर्स और अन्य चिकित्सा सहयोगी अपनी जान जोखिम में डालकर देश को कोरोना विषाणु से मुक्ति दिलाने में समर्पित भाव से लगे हुए हैं। पूरा देश सभी तरह के भेदभाव से ऊपर उठ कर कोरोना को खदेड़ने के लिए एकजुट हो गया है।

इसके अलावा देश के प्रसिद्ध खिलाड़ी, अभिनेता, उद्योगपति से लेकर छोटे से छोटा व्यक्ति भी जिससे जो संभव हो पा रहा है वह गर्दिश में फंसे असहाय लोगों की सेवा और मदद के लिए खुलकर सामने आ रहे हैं । अमीर से अमीर व्यक्तियों ने लॉकडाउन के कारण मुश्किल में फंसे लोगों के कल्याण के लिए अपनी-अपनी तिजोरियां खोल दी हैं। वहीं मानवता की सेवा के नाम पर गरीब से गरीब लोग भी अपने स्तर से जो भी संभव हो रहा है उसे करने में पीछे नहीं हट रहे हैं।

मौजूदा वैश्विक महामारी के दौरान जहां विभिन्न देशों के लाखों लोग संक्रमित हो चुके हैं और हजारों लोगों की मौत हो चुकी है ऐसी भयावह दौर में ज्यादातर लोग अपनी अपनी जान बचाने के लिए धैर्य और संयम बरत रहे हैं , वहीं बहुत से लोग सामने आई समस्याओं से पलायन करने के बजाय उनसे जूझ कर अपनी हिम्मत और साहस का परिचय दे रहे हैं।

अपने देश में परिवहन के सभी साधन लॉकडाउन के कारण बंद कर दिए जाने के फलस्वरूप प्रदेश में रह रहे लाखों मजदूर, छात्र और अन्य लोग जैसे-तैसे अपने घरों की ओर लौटने की जद्दोजहद कर रहे हैं वहीं हजारों मजदूर भूखे प्यासे सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पैदल ही चलकर तय करने में लगे हुए हैं। यह उनकी मजबूरी भी है लेकिन मजबूरी में भी अपनी मजबूती की मिसाल कायम करने में पीछे नहीं हट रहे हैं।

देश में मानवता की मिसाल पेश करने वालों में सबसे पहले लद्दाख के करगिल जिले के बच्चों की पहल तारीफे काबिल है, यहां बच्चों ने अपने पॉकेट मनी के पैसे कोरोना के मरीजों के लिए दान कर दिए हैं। इसी तरह सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर अपने अपने गांव घर जाने वाले हजारों मजदूरों को रास्ते में खाने पीने की वस्तुओं के साथ उन्हें अस्थाई आश्रय मुहैया कराने वाले अनगिनत सेवाभावी लोगों का योगदान भी भुलाया नहीं जा सकेगा।

इस क्रम में मध्य प्रदेश के गुना के एक दर्जी जगदीश हैं, जो लोगों के बीच मास्क सिल कर नि:शुल्क वितरित कर रहे हैं। मुंबई में एक मुस्लिम परिवार रोजाना भोजन तैयार कर 800 जरूरतमंदों के बीच बांट रहा है। विभिन्न जगहों पर किन्नर समुदाय के लोग भी भोजन तैयार कर जरूरतमंदों के बीच वितरण कर रहे हैं।

देश के विख्यात मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और गिरजाघर भले आराधना के लिए बंद हो गए हैं लेकिन इनकी ओर से भी मदद मिलने लगी है। तिरुपति मंदिर प्रबंधकों की ओर से 100 करोड़, शिर्डी के साईं मंदिर की ओर से 51 करोड़, वैष्णो देवी मंदिर की ओर से एक करोड़ दान में दिए गए। इनके अलावा अनेक छोटे-छोटे मंदिर प्रबंधकों ने भी लाखों रुपए दान दिए हैं। आनंदजी कल्याणजी पेढ़ी पालीताना जैन संघ की तरफ से कोरोना वायरस की महामारी को रोकने के लिए सरकार को 15 करोड़ और नाकोड़ा जैन ट्रस्ट की तरफ से 11 करोड़ का डोनेशन सरकार को दिया गया है।

दिल्ली के जामा मस्जिद ने भी इस कार्य में अपना योगदान दिया है। सनवलिया मन्दिर मंडल ने 50 लाख दान दिया है। जैन मुनि नय वर्धन सुरेश्वरलॉकडाउन ने 5 हजार आदिवासी परिवारों के लिए 15 दिन तक का भोजन उनके क्षेत्र में पहुंचा दिया है। पंजाब में हरियाणा में डेरा ब्यास संस्था ने एक करोड़ हरियाणा सरकार के राहत कोष में दान दिया है।

प्रधानमंत्री की अपील पर भाजपा के एक करोड़ कार्यकर्ता हर दिन भोजन के 5 पैकेट जरूरतमंदों के बीच बांट रहे हैं। इसके अलावा विभिन्न राजनैतिक दलों के सांसद सांसद निधि से करोड़ करोड़ रुपए जिला प्रशासन को लोगों की मदद के लिए दे रहे हैं। खेल जगत के सचिन तेंदुलकर और सौरभ गांगुली ने भी 50- 50 लाख रुपए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के राहत कोष में दान दिए हैं। धोनी और पठान बन्धुओं सहित बजरंग पूनिया और धावक हिमा दास ने भी अपने वेतन की राशि दान कर दी है।

उद्योगपतियों में अजीम प्रेमलॉकडाउन ने 50 हजार करोड़ दान दिया है तो अंबानी ने कोरोना के इलाज के लिए अस्पताल बनाने, इमरजेंसी सेवा के लिए मुफ्त तेल देने और रोजाना एक लाख मास्क का उत्पादन के लिए तैयार हो गए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र मुख्यमंत्री कोष में पांच करोड़ दान दिया है।

वाहन निर्माता बजाज ने 100 करोड़ दान देने की घोषणा की है। बाबा रामदेव के पतंजलि शोध सेंटर की ओर से कोरोना जांच के लिए लाखों रुपए की मशीन मुहैया की है। इनके अलावा यह उल्लेखनीय है कि सीआरपीएफ के जवानों ने भी अपने एक दिन का वेतन जमा कर 34 करोड़ दान किया है। कोराना के खौफ के बीच देश वासियों का यह योगदान देश को भीतर से मजबूत करने में जरूर सहायक होगा।

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