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निजीकरण के विरोध की वजह से चंडीगढ़ में इमरजेंसी जैसे हालात, शहर में बिजली सप्लाई ठप; हाईकोर्ट में सुनवाई …

नई दिल्ली। मोदी सरकार द्वारा सरकारी संस्थाओं का निजीकरण किए जाने के देशभर में विरोध हो रहा है। अकेले चंडीगढ़ में लोग मोदी सरकार के विरोध में सड़कों पर आ गए हैं। हलात यहां इमरजेंसी की तरह हो गए है। शहर में पानी सप्लाई ठप है, बिजली सप्लाई में खराबी आने की वजह से सड़कों पर अंधेरा पसरा हुआ है। कर्मचारी हड़ताल कर रहे हैं। स्थिति ये हो गई है कि हालात से निपटने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन को सेना बुलानी पड़ गई। सोमवार रात से ही यही स्थिति बनी हुई है। लोगों के घरों का इनवर्टर डिस्चार्ज हो चुका है।

हालात को देखते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले को संज्ञान में लिया है। कोर्ट ने बिजली विभाग के चीफ इंजीनियर को पेश होने के लिए बुलाया है। अगर कोर्ट में आज मामला नहीं सुलझा तो गुरुवार तक शहर में बिजली नहीं आएगी। दूसरी ओर से चंडीगढ़ प्रशासक गवर्नर बीएल पुरोहित के एडवाइजर ने हड़ताल पर बैठे यूनियन के नेताओं के साथ बैठक की है। मांग को लेकर दोनों पक्षों में बातचीत चल रही है। संकेत मिले है कि मामला सुलझ सकता है। अगर आज मामला सुलझ गया तो रात तक स्थिति नॉर्मल होजाएगी।

शहर में सोमवार शाम से ही हालात बिगड़े हुए हैं। चंडीगढ़ के हजारों घरों में बिजली-पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। लाइट सप्लाई ठप होने की वजह से कई इलाकों में ट्रैफिक लाइटें काम नहीं कर रही है। ट्रैफिल सिग्नल काम नहीं करने की वजह से शहर में जाम भी लग रहा है। लाइक नहीं होने की वजह से अस्पतालों में भी स्थिति बदतर हो गई है। कई अस्पतालों में ऑपरेशन भी टाल दिए गए हैं। लाइट की सप्लाई को मेंनटेन रखने के लिए प्रशासन ने मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस, वेस्टर्न कमांड और चंडी मंदिर से मदद मांगी है।

बिजली विभाग के निजीकरण का कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों की यूनियन अपनी मांग पर अड़ी हुई है। प्रदर्शन में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के कई नेता शामिल होकर इसको बड़ा रूप दे दिए। यहां तक कि 30 साल बाद प्रशासन ने एस्मा लगा दिया है।

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