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डूबते को तिनके का सहारा, पलायन फिर मुद्दा बनाएगी भाजपा, कल से कैराना में कैंपेन की शुरुआत करेंगे अमित …

नई दिल्ली। यूपी विधानसभा में भाजपा का परफारमेंस बहुत ही खराब है। पार्टी में बगावत के कारण भाजपा की टिकट वितरण की नीति मटियामेट हो गई है। जिसके कारण जो प्रत्याशी हार रहे थे उन्हें भी मजबूर होकर टिकट देना ही पड़ा। जिसके बाद से लोग अब मजबूरी का दूसरा नाम भारतीय जनता पार्टी कहने लगे हैं। विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद पहली बार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उत्तर प्रदेश में किसी राजनीतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। अमित शाह शनिवार को पश्चिमी यूपी के कैराना निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार के समर्थन में घर-घर प्रचार करेंगे। शाह राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में पार्टी के अभियान में अहम भूमिका निभा रहे हैं, वे इस दौरान शामली और बागपत में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी करेंगे। इसके बाद वे मेरठ में प्रतिष्ठित नागरिकों के साथ बातचीत करेंगे।

अमित शाह द्वारा यूपी में अपने पहले कार्यक्रम के तौर पर कैराना को चुनना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बीजेपी नेताओं ने 2017 के विधानसभा चुनावों में आरोप लगाया था कि 2013 के मुजफ्फरपुर दंगों के बाद धमकियों के कारण बड़ी संख्या में हिंदुओं को इस क्षेत्र से पलायन करने के लिए मजबूर किया गया। दरअसल, पश्चिमी यूपी में खासकर मेरठ से सटे शामली जिले के कैराना कस्बे में मुस्लिमों के कथित डर से हिंदू परिवारों का पलायन एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। शामली और मुजफ्फरनगर जिले में 40 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी है। भाजपा के दिग्गज नेता और तत्कालीन प्रमुख गुर्जर नेता हुकुम सिंह ने भी पिछले 2017 के विधानसभा चुनावों के दौरान कैराना के हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाया था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री अमित शाह दोनों ने इस मुद्दे पर खूब बात की है। हालांकि हिंदुओं के पलायन के मुद्दे के बावजूद कैराना सीट से 2017 में सपा उम्मीदवार नाहिद हसन बड़ी जीत हासिल करने में कामयाब रहे थे। वहीं भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह दूसरे नंबर पर रही थीं। एक बार फिर से भाजपा ने मृगांका सिंह को टिकट दिया है। ऐसे में कहा जा रहा है कि अमित शाह अपने चुनावी अभियान में फिर से हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठा सकते हैं।

कैराना से समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर से नाहिद हसन को उम्मीदवार बनाया था लेकिन नामांकन पत्र दाखिल करने के एक दिन बाद ही उनकी गिरफ्तारी हो गई। इस गिरफ्तारी के साथ ही यहां लंबे समय से चल रहे राजनीतिक झगड़े की कमान दो परिवारों की महिला सदस्यों पर आ गई है। कैराना से दो बार विधायक रहे नाहिद के पक्ष में उनकी बहन इकरा हसन खड़ी हैं, जो यूरोप से कानून की पढ़ाई करके आई हैं और कहती हैं कि वह अपने भाई के स्थान पर कोई भी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं। वहीं दूसरी तरफ भाजपा के टिकट से दिवंगत भाजपा नेता और कैराना से तीन बार के विधायक रहे हुकुम सिंह की चार बेटियों में सबसे बड़ी मृगांका सिंह मैदान में हैं। 34 वर्षीय नाहिद की गिरफ्तारी गैंगस्टर एक्ट के तहत हुई है। मंगलवार को एक अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

वहीं मृगांका अब अपने पिता की विरासत को अपने हाथों में लेने की तीसरी कोशिश कर रही हैं। हुकुम सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1974 में कांग्रेस से की थी, जब उन्होंने पहली बार कैराना विधानसभा सीट जीती थी। उन्होंने दो बार फिर से सीट जीती, एक बार जनता पार्टी (सेक्युलर) के टिकट पर। लंबी हार के बाद, वह 1995 में भाजपा में शामिल हो गए और चार बार कैराना सीट का प्रतिनिधित्व किया। वह 2009 के आम चुनाव हार गए, लेकिन 2014 में लोकसभा के लिए चुने गए थे।

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