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मंदिर में रुपए-पैसे, धन-दौलत नहीं चढ़ाएं सिर्फ बीड़ी और फूल, होती है मनोकामना पूरी, आप भी आजमाएं …

नई दिल्ली। भारत को ऐसे ही ऋषि और मुनियों का देश नहीं कहा जाता था। इस देश में धर्म, भावना और आस्था का स्थान काफी ऊपर है, लोग तरह तरह के भगवान की पूजा करते हैं और इसमें उनको काफी खुशी भी मिलती है। मंदिर में सोने-चांदी, हीरे-जवाहरात व नकद रूपए लोग दान करते हैं। इसी कड़ी में एक मामला बिहार से सामने आया है जहां के एक मंदिर में लोग बीड़ी चढ़ाते हैं। खास बात यह है कि इस मंदिर में बीड़ी चढ़ाने के लिए लोगों की लाइन लगी रहती है।

दरअसल, यह मंदिर बिहार के कैमूर जिले में स्थित है। रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर कैमूर जिले के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित अघौरा पहाड़ चढ़ने से पहले खुटिया इलाके में बना हुआ है। इस मंदिर में मुसहरवा बाबा की मूर्ति प्रतिस्थापित है और वही इस मंदिर के भगवान हैं। जैसे लोग अन्य मंदिरों में अगरबत्ती और दीये जलाते हैं वैसे ही यहां बाबा के मंदिर में बीड़ी जलाई जाती है।

बताया जाता है कि यहां काफी संख्या में लोग पहुंचते हैं और मंदिर में मुसहरवा बाबा के दर्शन के बाद उन्हें बीड़ी का बंडल खोलकर उसे सुलगाना पड़ता है और फिर चढ़ाना पड़ता है। यहां पर बाबा को बीड़ी का भोग लगाने से वे प्रसन्न होते हैं और बीड़ी चढ़ाने वाले की इच्छा को पूरी करते हैं। मान्यता यह भी है कि इधर से होकर गुजरने वाला प्रत्येक यात्री बीड़ी का भोग लगाता है। ऐसा करने से उसकी इच्छा पूरी हो जाती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मंदिर के पुजारी का नाम गोपाल बाबा है। उनका कहना है कि यहां तक पहुंचने के लिए पहाड़ी का सफर तय करना पड़ता है। इस दौरान सावधानी की सामग्री के साथ एक बंडल बीड़ी लेकर आना होता है। उसके बाद ही आपकी यात्रा पूरी मानी जाएगी। पुजारी के मुताबिक मुसहरवा बाबा को वर्षों से बीड़ी का भोग लगता रहा है। जो यात्री या राहगीर बीड़ी का भोग लगाना भूल जाते हैं वो दोबारा लौटकर आते हैं और भोग लगाकर जाते हैं।

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