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अमरकंटक से लगा धर्मपानी जहां से प्रकृति का नजारा देखने लायक है …

नर्मदा परिक्रमा भाग- 34

अक्षय नामदेव। धर्मपानी आश्रम में लगभग 5:30 बजे हमारी नींद खुल गई । तारीख थी 1 अप्रैल 2021,परंतु अप्रैल महीने कि 1 तारीख को भी धर्म पानी आश्रम मां नर्मदा पंचकोशी परिक्रमा तीर्थ क्षेत्र अमरकंटक में ठंड इतनी थी कि उठने की इच्छा ही नहीं हो रही थी। साल वनों से आच्छादित होने के कारण गर्मी में भी यहां रात्रि में एक कंबल की जरूरत तो होती ही है। हमें धर्म पानी में सूर्योदय देखना था इसलिए आलस का परित्याग किया और आश्रम के पीछे सटी खाई के पास जाकर खड़े हो गए। कुछ देर में ही सूर्यनारायण की कोमल किरणों से नर्मदा की घाटी लालिमा युक्त हो गई। बेटी मैंकला के लिए सनराइज प्वाइंट पर इस तरह सूर्य को देखने का पहला अनुभव था। उसके मुंह से अनायास ही निकल पड़ा प्रकृति की पूरी खूबसूरती तो यहीं है पापा,,, हम सौभाग्यशाली हैं कि हम ऐसी जगह रहते हैं।

दरअसल धर्म पानी है ही ऐसी जगह जहां प्रकृति ने पूरी कृपा की है। मां नर्मदा पंचकोसी परिक्रमा तीर्थ क्षेत्र अमरकंटक में स्थित धर्म पानी सही मायने में गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के ग्राम पंचायत ठाढ़ पथरा तहसील गौरेला में स्थित है। मैकल पर्वत पर स्थित तीन और से ऊंची चोटियों से घिरे धर्मपानी के पूर्व दिशा में गहरी लंबी खाई है इसी खाई के नीचे ठाड़पथरा ग्राम पंचायत, आमा नाला का पिपलायन आश्रम एवं माई का मड़वा स्थित है । धर्म पानी वह जगह है जहां आप अमरकंटक के तराई गांव अर्थात गौरेला क्षेत्र के गांव का दर्शन कर सकते हैं मलानिया बांध का भी दर्शन यहीं से हो जाता है जो यहां से एक तालाब जैसा दिखाई देता है। धर्म पानी में एक प्राकृतिक जल स्रोत है जो गर्मी के दिनों में भी नहीं सूखता। समीप खाई के सटकर काली गुफा है जो सिद्ध मूर्ति है।

मां नर्मदा की पंचकोशी परिक्रमा करने वाले परिक्रमा वासी धर्म पानी स्थान पर रुके बगैर नहीं जाते तथा यहां अनिवार्य रूप से मां काली का दर्शन करते हैं। धर्म पानी ही नहीं जालेश्वर महादेव, दुर्गा धारा, माई का मड़वा माई की बगिया एवं सोनमूंड़ा यह सभी तीर्थ मां नर्मदा पंचकोशी परिक्रमा तीर्थ क्षेत्र में ही स्थित है और ये सभी स्थान छत्तीसगढ़ के गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में आते हैं। साल वनों से अच्छादित अमरकंटक के तराई का यह इलाका पर्यावरण एवं आध्यात्मिक प्रेमियों को बरबस ही आकर्षित करता है। मां नर्मदा पंचकोसी परिक्रमा तीर्थ क्षेत्र में होने के कारण इनका आध्यात्मिक महत्व है। हर साल हजारों साधु सन्यासी, मनीषी एवं गृहस्थ अमरकंटक आकर इन स्थानों से होते हुए मां नर्मदा की पंचकोशी परिक्रमा कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। गौरेला से पकरिया होकर दुर्गा धारा के रास्ते अमरकंटक जाने वाले मार्ग पर धर्म पानी पड़ता है। थाना गौरेला की आखिरी सीमा धर्म पानी आश्रम ही है।

वर्ष 1989 90 के आसपास महात्मा जितेंद्रानंद नामक एक बंगाली बाबा अमरकंटक आए थे। उन्होने तपस्या के लिए धर्म पानी को चुना और यहां खाई के ऊपर अपनी पर्णकुटी बनाकर रहने लगे और इसी धर्म पानी आश्रम से बाद में परिक्रमा वासियों की सेवा भी होने लगी। वर्ष 2004 में जब छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनी तब तत्कालीन वन अधिकारियों को महात्मा जितेंद्रानंद की तपोस्थली पसंद आ गई और उन्होंने यहां वन विभाग का वॉच टावर बनाने के नाम पर बाबा जितेंद्रानंद का आश्रम तोड़ दिया जिसका गौरेला पेंड्रा के धर्म प्रेमी लोगों ने पुरजोर विरोध किया था। बाद में वन विभाग ने उस जगह पर वॉच टावर ना बनाकर रेस्ट हाउस बना दिया।

बाबा जितेंद्रानंद अपने शिष्यों सहित अनशन पर बैठ गए। बाबा के अनशन को गौरेला पेंड्रा के धर्म प्रेमियों का जबरदस्त समर्थन मिला । यह बात छत्तीसगढ़ के तत्कालीन वन एवं पर्यावरण मंत्री बृजमोहन अग्रवाल तक गई और उन्होंने वन अधिकारियों को उन्हें मनाने को कहा। वन अधिकारियों ने महात्मा जितेंद्रानंद और उनके शिष्यों से माफी मांगी तथा उन्हें मना कर उनके ध्वस्त किए गए आश्रम के दाहिनी ओर की जगह दी गई जहां वर्तमान में धर्म पानी स्थित है। 21 जून वर्ष 2012 में महात्मा जितेंद्रानंद ब्रह्मलीन हो गए और अब उनके शिष्य सन्यासी रामानंद एवं सन्यासी धर्मानंद धर्म पानी आश्रम की देखरेख करते हुए परिक्रमा वासियों की सेवा में लगे रहते हैं। धर्म पानी आश्रम में परिक्रमा वासियों की सेवा निरंतर चलती रहती है तथा अनेक श्रद्धालु एवं परिक्रमा वासी यहां आश्रय पाते हैं।

धर्म पानी आश्रम पूर्ण रूप से आडंबरमुक्त सेवा और सादगी से परिपूर्ण है परंतु यहां परिक्रमा वासियों के आश्रय के लिए एक शेड बनाए जाने की आवश्यकता महसूस हो रही है। बरसात के समय चतुर्मास बिताने वाले साधु सन्यासियों के लिए यह अत्यंत जरूरी है। अन्य धार्मिक पर्व महाशिवरात्रि, मकर संक्रांति पर्व पर भी यहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में रुकते हैं।यहां धर्म पानी आश्रम में रहने वाले सन्यासी रामानंद को अक्सर यह बात खेदित करती रहती है कि मां नर्मदा पंचकोशी परिक्रमा तीर्थ क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद भी यहां की धार्मिक मर्यादाओं का पालन नहीं किया जाता तथा लोग पंचकोसी परिक्रमा तीर्थ क्षेत्र में मांसाहार एवं शराब खोरी करते हैं।

उन्होंने पहले भी हमसे कई बार अपना यह दुख व्यक्त किया है परंतु हम ही है जो इसका उचित समाधान नहीं निकाल सके। बस उन्हें यह कह सके कि स्वयं की आत्मा के जागृत होने पर ही यह सब रुकेगा। हमारे बस की बात नहीं है। उस दिन 1 अप्रैल 2021को सुबह जब हम बैठकर चाय पी रहे थे तब भी सन्यासी रामानंद ने हमें अपनी चिंता से अवगत कराया। हमारे वरिष्ठ साथी परिक्रमा वासी रामनिवास तिवारी और मैं उन्हें यही कह सके कि धर्म पानी आश्रम की सीमा वारवेट वायर से सुरक्षित होने के बाद इन समस्याओं से मुक्ति मिलेगी।

बहरहाल सूर्योदय का दृश्यालोकन करने के बाद हम जल्दी से दैनिक क्रिया से निवृत्त हो स्नान कर लिया तथा मां नर्मदा की पूजा अर्चना कर आगे की परिक्रमा में जाने की तैयारी करने लगे। हमें आगे अमरकंटक में राम घाट पर तट पूजा करनी थी उसके बाद माई के बगिया जाकर परिक्रमा पूर्ण करनी थी। इस बीच आश्रम के भैया ने एक बार फिर हमारे लिए चाय बना दी थी। हमने आश्रम में चाय पी और सन्यासी रामानंद को प्रणाम कर हम आगे रामघाट के लिए निकल पड़े।

हर हर नर्मदे                                                                                क्रमशः

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