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दिल्ली दरबार: क्या चिराग बचा पाएंगे अपनी राजनीतिक विरासत या फिर भी चाचा मारेंगे बाजी …

नई दिल्ली (पंकज यादव) । कुछ साल पहले समाजवादी पार्टी में जिस तरह से चाचा—भतीजा की लड़ाई सामने आई थी उसी तर्ज पर लोक जनशक्ति पार्टी में भी चाचा—भतीजा की लड़ाई सामने आ गई है। हालांकि समाजवादी पार्टी की लड़ाई में भतीजा अखिलेश यादव पार्टी पर कब्जा जमाने में कामयाब रहे लेकिन चाचा शिवपाल यादव को दूसरे दल का गठन करना पड़ा।

लेकिन लोक जनशक्ति पार्टी में क्या चिराग पासवान अपनी पार्टी को बचा पाएंगे या फिर चाचा पशुपति नाथ पारस का कब्जा हो जाएगा। दरअसल अब लड़ाई वहीं खुलकर आ गई है कि लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान का असली वारिस कौन? बेटे चिराग या फिर चाचा पशुपति नाथ पारस। मामला दिलचस्प है लोकसभा में पशुपति नाथ पारस के नेतृत्व में पांच सांसदों के गुट को लोजपा का दर्जा देकर नेता घोषित कर दिया गया है। वहीं चिराग पासवान भी लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर बता रहे हैं कि असली लोजपा उनके पास है। जोर आजमाइस का दौर चल रहा है और पाला किसके हाथ में होगा ​अभी कहना मुश्किल है। लेकिन लोजपा के पांच सांसद एक साथ हैं और चिराग पासवान अकेले।

बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान कहकर सुर्खिंयां बटोरने वाले चिराग पासवान की पार्टी का बुरा हस्र हुआ था। इस बीच रामविलास पासवान के निधन ने लोजपा में फूट के संकेत साफ तौर पर दे दिए। बहरहाल अब चिराग के आगे की रणनीति क्या होगी इसका खुलासा तो अभी उन्होंने नहीं किया है लेकिन उनके समर्थकों ने पशुपति नाथ पारस के विरोध में प्रदर्शन तेज कर दिया है। लोजपा का भविष्य अब क्या होगा यह आने वाला समय बताएगा। पशुपति नाथ पारस के हाथ में लोजपा की असली कमान होगी या फिर चिराग के पास। लेकिन बात तो तय हो गई है कि अब लोजपा का भविष्य जरूर अधर में हो गया है। क्योंकि रामविलास पासवान के रहते जो लोजपा बिहार में एक ताकत के रूप में थी अब उसमें दो फाड़ हो गया है और अब इस पार्टी को मजबूती मिलना मुश्किल ही लग रहा है।

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