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दिल्ली दरबार: किसकी जासूसी कैसी जासूसी …

नई दिल्ली (पंकज यादव) । पेगासस प्रोजेक्ट के जरिए कथित जासूसी का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। एक तरफ जहां संसद में विपक्ष हमलावर है वहीं सरकार भी विपक्ष को घेरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। मंगलवार को तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर विपक्ष को जमकर आड़े हाथों लिया। 

सवाल यह है कि यह जो प्रकरण उठा है वह संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले क्यों लीक किया गया। यह कहीं न कहीं साजिश की ओर इशारा तो कर रही है। दूसरी तरफ सवाल यह है कि जिस तरह की जासूसी की बात की जा रही है तो भारत सरकार के पास अपने इतने तंत्र हैं कि वह किसी की भी डिटेल जानकारी ले सकती है। मुद्दा साफ है कि पेगासस के जरिए जो जासूसी का मामला सामने आया है वह निश्चित तौर पर विदेशी साजिश का हिस्सा है। इसमें कौन लोग शामिल हैं और क्यों शामिल हैं उसकी पड़ताल होनी चाहिए। दूसरी तरफ सोमवार को जब मानसून सत्र की शुरूआत हुई तो प्रधानमंत्री को मंत्रियों के परिचय के दौरान यह बताने की जरूरत क्यों पड़ी कि पिछड़े, दलित, महिलाओं को मंत्री बनाया गया है। आशय साफ है यह सब जो बहसबाजी है वह केवल सत्र के दौरान ही गूंजने वाली है उसके बाद मुद्दे भी गायब हो जाएंगे और जासूसी का मामला भी।

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