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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का कांग्रेस नेताओं को आदेश, टीके पर हिचक करें दूर, बर्बादी भी रोकें …

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने देश में कोरोना टीकाकरण की धीमी गति को लेकर चिंता प्रकट की है। गुरुवार को डिजिटल मीटिंग के दौरान उन्होंने पार्टी महासचिवों से कहा कि वैक्सीन के प्रति हिचकिचाहटों को दूर करने के लिए काम करें। साथ ही सोनिया गांधी ने मीटिंग में पार्टी के महासचिवों से कहा कि वे यह भी सुनिश्चित करें कि वैक्सीन की बर्बादी कम-से-कम हो। महामारी की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए तेडी से तैयारी करने और खासकर बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाने की जरूरत है।

सोनिया गांधी ने कहा, महामारी से संबंधित दो अतिरिक्त बिंदुओं पर मैं कुछ कहना चाहती हूँ। विशेषज्ञ अब से कुछ महीनों बाद संभावित तीसरी लहर की बात कर रहे हैं। उनमें से कुछ आने वाले महीनों में बच्चों की इस महामारी के प्रति भेद्यता की ओर इशारा कर रहे हैं। इस पर भी तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है और हमें इस संबंध में प्रभावशाली कदम उठाने चाहिए ताकि बच्चों को इस आपदा से बचाया जा सके। यदि इस महामारी का पुनः आक्रमण होता है तो उससे बेहतर तरीके से निपटने के लिए हमें कारगर कदम उठाने होंगे। पिछले चार महीनों में इस महामारी की दूसरी लहर पूरे देश में लाखों-लाखों परिवारों के लिए भयावह रुप से विनाशकारी रही है। हमें इस अत्यंत पीड़ादायक अनुभव से सीख लेनी चाहिए ताकि पुनः इससे दो-चार न होना पड़े।”

कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने डिजिटल बैठक में महासचिवों और प्रभारियों को संबोधित किया। जिसमें उन्होंने टीकाकरण की गति को लेकर गहरी चिंता प्रकट की. कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर की तैयारी करने और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर भी उन्होंने अधिक जोर दिया।

सोनिया गांधी की अगुवाई में चल रही इस बैठक में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी जैसे मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने की रणनीति बनाई जाएगी। सोनिया गांधी ने कहा, “ईंधन की बढ़ती कीमतों से सामान्य लोगों पर पड़ रहे असहनीय बोझ से आप सभी वाकिफ हैं। किसानों और लाखों परिवारों को इससे कितना कष्ट हो रहा है, इस तथ्य को उजागर करने के लिए आंदोलन आयोजित किए गए। लेकिन ईंधन के अलावा, कई अन्य आवश्यक वस्तुओं जैसे दालों और खाद्य तेलों की कीमतें भी आसमान छू रही हैं, जिससे व्यापक संकट पैदा हो गया है। यह मूल्य वृद्धि ऐसे समय में हो रही है जब अभूतपूर्व संख्या में लोग अपनी आजीविका खो रहे हैं, जब बेरोजगारी बढ़ रही है और आर्थिक रिकवरी मात्र मृग तृष्णा है।”

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