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कांग्रेस ने 1953 में Air India का किया था अधिग्रहण, भाजपा की मोदी सरकार ने 2021 में कर दी घर वापसी …

नई दिल्ली। वर्ष 1932 में जेआरडी टाटा ने एयर इंडिया के नाम से एयरलाइंस कंपनी की शुरूआत की थी। जिसके लोगो में एक महाराजा आने-जाने वाले यात्रियों का झुककर अभिनंदन करता हुआ नजर आ रहा था। कांग्रेस की सरकार ने तात्कालीन बड़ा कदम उठाते हुए 1953 में इसका अधिग्रहण कर लिया था और तब से यह सरकारी एयरलाइन्स था। देश में भाजपा के मोदी सरकार के आने के बाद से अधिग्रहित किए गए संस्थाओं व उपक्रमों का निजीकरण किया जाना जारी है। इसी के तहत भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार ने Air India की घर वापसी कर दिया।

कथित तौर पर लंबे समय से घाटे में चल रही एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया की घर वापसी हो गई है। इस एयरलाइन को टाटा समूह ने 18 हजार करोड़ रुपए की बोली जीत अपने नाम किया है। टाटा को ये सफलता ऐसे समय में मिली है जब देश की एविएशन इंडस्ट्री में बड़े बदलाव की बयार शुरू होने वाली है।

दरअसल, भारतीय एविएशन इंडस्ट्री में एक नई एयरलाइन कंपनी की एंट्री होने वाली है। अकासा नाम की ये एयरलाइन कंपनी शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला की होगी। ऐसा माना जा रहा है कि इस वित्त वर्ष के अंत तक झुनझुनवाला की एयरलाइन शुरू हो सकती है। नई एयरलाइन कंपनी में झुनझुनवाला करीब 3.5 करोड़ डॉलर के निवेश पर विचार कर रहे हैं। इसके जरिए झुनझुनवाला की अकासा में 40 फीसदी हिस्सेदारी लेने की योजना है।

अप्रैल 2019 से बंद चल रही जेट एयरवेज नए साल में उड़ान भरने वाली है। जेट एयरवेज 2022 की पहली तिमाही से अपनी घरेलू उड़ानें शुरू कर सकती है। लंबे समय तक आसमान में दबदबा बनाए रखने वाली इस कंपनी पर कर्ज का बोझ था। हालांकि, करीब ढाई साल बाद जालान कालरॉक समूह ने जेट एयरवेज को संजीवनी दी है।

एयर इंडिया की डील के बाद अब टाटा समूह के पास तीन एयरलाइन- एयर इंडिया, विस्तारा और एयर एशिया हो गई है। इन तीनों कंपनियों की डोमेस्टिक एयरलाइन इंडस्ट्री में करीब 25 फीसदी हिस्सेदारी है। ये भी देखना अहम है कि टाटा समूह तीनों एयरलाइन को मैनेज करती है।

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