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मप्र में दुर्गा उत्सव को लेकर असमंजस : पिछले साल हंगामे के कारण अंतिम समय में सीएम ने बदली थी गाइड लाइन…

भोपाल। मध्यप्रदेश में दुर्गा उत्सव और दशहरा को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पिछले साल शासन को दो बार गाइड लाइन बनाना पड़ी थी। प्रतिमा की ऊंचाई 6 फीट तक करने के कारण हिंदू संगठनों ने हंगामा किया था, जिसे देखते हुए अंतिम समय में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आदेश पर गाइड लाइन बदली थी।

 

इस साल तो अब तक कोई गाइड लाइन ही जारी नहीं की गई है। ऐसे में मूर्तिकार से लेकर आयोजन समिति और आम लोग असमंजस में हैं। भोपाल की सामाजिक व धार्मिक संस्था श्री हिन्दू उत्सव समिति ने आगामी दुर्गा उत्सव एवं दशहरा की गाइड लाइन जारी करने के लिए शासन से मांग की है। समिति के अध्यक्ष कैलाश बेगवानी व मीडिया प्रभारी राजेश जैन ने बताया कि दस दिवसीय मां भगवती की आराधना का प्रमुख पर्व दुर्गा उत्सव प्रारम्भ होने में कुछ ही दिन शेष है। वर्षो से भोपाल सहित देश भर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा विगत वर्ष से वैश्विक महामारी कोरोना के कारण सभी प्रमुख त्योहारों पर प्रतिबंधात्मक दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

 

इस वर्ष दुर्गा उत्सव पर्व नजदीक है ओर मूर्तिकारों एवं झांकी निर्माताओं द्वारा तैयारियां भी प्रारम्भ कर दी हैं, लेकिन अभी तक जिला प्रशासन द्वारा कोई गाइड लाइन जारी नहीं की गई है। श्री हिन्दू उत्सव समिति द्वारा जिला कलेक्टर भोपाल को एक ज्ञापन भी दिया जा चुका है। इसमें दुर्गा उत्सव एव दशहरा में झांकियों की रूप रेखा कैसी होगी। प्रतिमाओं का आकार, विद्युत साज सज्जा, ध्वनि विस्तारक यंत्रों का स्तर कैसा होगा। इस संबंध में मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए जाने की मांग की है।

 

अंतिम समय में गाइड लाइन बदली थी

मध्यप्रदेश में पिछले साल नवरात्र और दशहरा दोनों त्योहारों के लिए राज्य सरकार ने गाइडलाइन जारी की थी। 18 सितंबर को मध्यप्रदेश में नवरात्र को लेकर नियम बनाए गए। इसे लेकर खूब हंगामा हुआ। दुर्गा प्रतिमा की अधिकतम ऊंचाई 6 फीट होना और पंडालों की लंबाई और चौड़ाई 10 गुणा 10 फीट समिति करने से हिंदू संगठन ने 27 सितंबर को भोपाल में प्रदर्शन किया। इसके बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर जिसके बाद मध्यप्रदेश सरकार ने 3 अक्टूबर को अपना फैसला बदल दिया।

यह थी पिछले साल की गाइड लाइन

  • – 6 फीट ऊंचाई की बंदिश हटाई
  • – पंडाल की लंबाई और चौड़ाई 30 गुणा 45 कर दी गई
  • – चल समारोह की अनुमति नहीं थी
  • – विसर्जन के दौरान आयोजन समिति के अधिकतम 10 लोग ही शामिल हो सकते थे
  • – गरबा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया था
  • – दशहरा उत्सव पर रामलीला और रावण दहन की अनुमति दी गई थी
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