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विश्व मानवता की पूर्णतः रक्षा गांधी दर्शन से संभव – प्रो. प्यारेलाल आदिले

बालोद / दुर्ग। आज के इस वैज्ञानिक युग और भौतिकवादी उहापोह के समय में गांधी दर्शन निश्चित तौर पर मानव समाज में समानता, न्याय, बंधुत्व और भाईचारा के लिए कारगर सिद्ध हो सकता है, किंतु केवल गांधी को बोलने और लिखने से नहीं अपितु गांधी को पूर्ण रुप से लागू करने पर संभव है ।

गांधी दर्शन के आधार पर अगर समाज की उन्नति चाहिए तो निश्चित तौर पर डॉ. अंबेडकर द्वारा प्रदत संविधान में उपबंधित बातों को अक्षरशः लागू करना होगा। क्योंकि संविधान के द्वारा ही गांधी दर्शन को अमलीजामा पहनाया जा सकता है। यद्यपि आज प्रत्येक सरकारें गांधी के दर्शन पर अपना सकारात्मक दृष्टिकोण तो रखते हैं किंतु उनके कार्यक्रमों को लागू करने में हिचकते हैं।

अतः मेरी गुजारिश है कि सभी एकसाथ मिलकर गांधी दर्शन पर आधारित विकासोन्नमुखी कार्य योजना बनाकर उसे समाज में लागू किया जाना चाहिए। इस हेतु युवा वर्ग अपने बुद्धिमता और कौशल का उपयोग अवश्य करें।

उदाहरण और काव्य शैली में उक्त विचार प्रोफेसर प्यारेलाल आदिले प्राचार्य व प्रमुख जेबीडी कला एवं विज्ञान महाविद्यालय कटघोरा छत्तीसगढ़ ने उच्च शिक्षा विभाग के द्वारा प्रायोजित तथा शासकीय घनश्याम सिंह गुप्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय बालोद द्वारा आयोजित राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में प्रथम तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता व विषय विशेषज्ञ के रूप में अपने विचार प्रस्तुत किए।

उल्लेखनीय है कि इस राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में अंतरराष्ट्रीय हिंदी महात्मा गांधी विश्वविद्यालय वर्धा के हिंदी विभाग के प्राध्यापक प्रोफेसर नृपेंद्र प्रसाद मोदी ने उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि और विषय विशेषज्ञ के रूप में अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज समय है गांधीजी के प्रत्येक गतिविधियों और संदेशों को मानने का क्योंकि आज समाज में भ्रष्टाचार और बुराई ने अपना जड़ मजबूत किए जा रहा है, इसलिए गांधी को युवा साथी मुख्य रूप से आत्मसात करें।

रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के समाजशास्त्र विभाग के एसोसिएट प्राध्यापक डॉ. एलएस गजपाल ने उद्घाटन सत्र के प्रथम वक्ता के रूप में अपना विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि गांधी आज हरेक मायने में प्रासंगिक है। डॉ. श्रीमती अश्विनी महाजन प्राध्यापक, समाजशास्त्र विभाग, शासकीय महाविद्यालय दुर्ग तथा डॉ. आरके ठाकुर प्राचार्य, शासकीय कुंज बिहारी चौबे महाविद्यालय, लाल बहादुर नगर, राजनांदगांव ने अपना शोधपरक विचार प्रस्तुत किया। अन्य वक्ताओं में शासकीय महाविद्यालय गुरुर के प्राचार्य डॉ. जेएल बघेल, प्रो. जयंती सिंह, लव कुमार सिंह, कु. मधु साहू तथा प्राचार्य डॉ. जैन ने अपने विचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम के प्रारंभ में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. कोमल सिंह शार्वा ने समस्त अतिथियों के प्रति स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए अपना गांधी दर्शन पर विचार रखा। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. ज्योतिस कुमार खलखो ने समस्त प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। संगोष्ठी का संपूर्ण संचालन डॉ. श्रीमती दीपाली राव ने किया।

इस संगोष्ठी को सफल बनाने के लिए आयोजन समिति में प्रो. डीआर वैद्य, प्रो सीडी मानिकपुरी, डॉ. राकेश पांडे, प्रो. एलके गवेल, प्रो. जीएन खरे, प्रो. जेआर नायक एवं डॉ. शहनाज बेगम आदि का सराहनीय सहयोग रहा।

संगोष्ठी में लगभग 50 शोध पत्र पढ़े गए। “सामयिक संदर्भ में गांधी दर्शन की प्रासंगिकता” विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में प्राप्त विभिन्न प्राध्यापकों के सुझाव को शासन तक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया जाएगा। इस संगोष्ठी में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं छात्र संघ के समस्त पदाधिकारी विशेष तौर पर मौजूद थे।

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