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सीएम का ऐलान: बाढ़ पीड़ितों को दिया जाएगा 50 किलो अनाज, हालात सुधरने तक हर रोज खाना…

भोपाल (कैलाश गौर)। के ग्वालियर चंबल संभाग में बाढ़ के हालात कुछ हद तक काबू में आए हैं। शिवपुरी में बारिश थमने से लोगों को राहत मिली है, लेकिन भिंड, मुरैना और दतिया में अभी स्थिति ठीक नहीं है। चंबल संभाग के करीब 500 गांव इस बाढ़ में पूरी तरह डूबे हुए हैं। इस बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया है कि जब तक ग्रामीण अपने घरों तक नहीं पहुंच जाते और खाना बनाने की स्थिति नहीं बन जाती, तब तक सरकार दोनों वक्त का भोजन कराएगी। सभी पीड़ित परिवारों को 50 किलो अनाज तत्काल दिया जा रहा है। मवेशियों के मरने तक पर सरकार ने राहत देने का ऐलान किया है।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अति वृष्टि और बाढ़ की स्थिति से प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करके ही हम चैन की साँस लेंगे। संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार हर बाढ़ प्रभावित के साथ है। गाँवों में जब तक घरों में भोजन बनाने की स्थिति नहीं बन जाती, तब तक भोजन प्रदाय की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। प्रत्येक प्रभावित परिवार को 50 किलो गेहूँ तत्काल प्रदान किया जाये। बिजली व्यवस्था को पुनर्स्थापित करने और मोबाइल नेटवर्क की पुनर्स्थापना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। जिन परिवारों के घर ढह गए हैं उनके लिए छत की व्यवस्था करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ग्वालियर-चंबल संभाग के प्रभारी मंत्री, स्थानीय मंत्री, कमिश्नर एवं कलेक्टर्स के साथ राहत के संबंध में निवास से वीसी द्वारा चर्चा कर रहे थे। इस बीच भिंड में सिंध और चंबल दोनों ही नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर ही है। चंबल में जलस्तर बढ़ रहा है। सहकारिता मंत्री अरविंद सिंह भदोरिया के विधानसभा क्षेत्र अटेर में एक दर्जन गांव चंबल की बाढ़ की चपेट में आए हैं। सिंध नदी में जलस्तर कम हुआ है, लेकिन चंबल नदी का तेज बहाव मुसीबत बना हुआ है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि उप राष्ट्रपति एम. वैंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर स्थिति की सतत जानकारी ले रहे हैं। केंद्र से हरसंभव सहयोग प्राप्त हो रहा है। मोबाइल नेटवर्क तथा रेल मार्ग पुन: स्थापित करने में त्वरित रूप से सहायता प्राप्त हो रही है। सीएम ने निर्देश दिए कि राहत शिविरों में भोजन, पीने के पानी, पर्याप्त दवाओं, बीमार व्यक्तियों के परीक्षण और उपचार की व्यवस्था की जाए। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि राहत शिविरों में बीमारी नहीं फैले। सभी कलेक्टर तथा प्रशासनिक अमला पूर्ण दक्षता व युक्ति से राहत और बचाव कार्यों का क्रियान्वयन करें। यह परीक्षा की घड़ी है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने दतिया, गुना, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, शिवपुरी और श्योपुर की स्थिति की वर्चुअली जानकारी ली। उनके साथ गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस तथा अन्य अधिकारी बैठक में उपस्थित थे। इस वीडियो कांफ्रेंस में ग्वालियर से ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, भिंड से सहकारिता मंत्री अरविंद सिंह भदोरिया, मुरैना से उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण (स्वतंत्र प्रभार) राज्यमंत्री भारत सिंह कुशवाह और शिवपुरी से खेल एवं युवा कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया वर्चुअली सम्मिलित हुए। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री ओपीएस भदौरिया ने भी कांफ्रेंस में भाग लिया। वीडियो कांफ्रेंस में अवगत कराया गया कि एनडीईआरएफ की 3-3 टीमें क्रमश: शिवपुरी, मुरैना और भिंड में बचाव और राहत कार्य में जुटी हैं। वायु सेना के 5 हेलीकॉप्टर भी कार्यरत हैं। नावों से बचाव कार्य जारी है। गुरुवार सुबह 5.30 बजे से आरंभ हुए बचाव कार्य में 221 लोगों को सुरक्षित स्थल पर पहुंचाया गया। एनडीईआरएफ, एसडीईआरएफ, बीएसएफ भी जिलों में लगातार बचाव के कार्य में लगी हैं।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि श्योपुर में बहुत अधिक तबाही हुई है। लोगों को सहायता की जरूरत है। ग्वालियर और मुरैना कलेक्टर, श्योपुर में व्यवस्थाएं पुन: स्थापित करने और जन-सामान्य को भोजन, पेयजल, दवाएं तथा अन्य आवश्यक राहत उपलब्ध कराने में हरसंभव मदद करें। हर दो घंटे में सूखी खाद्य सामग्री भेजना सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने सामाजिक संगठनों से भी सहयोग की अपील की। मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने अवगत कराया कि ग्वालियर से भोजन के 5 हजार पैकेट श्योपुर भेजे जा रहे हैं।

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