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चुपके से चीन ने टेस्ट कर लिया स्पेस प्लेन, रॉकेट की तरह भरता है उड़ान, दोबारा भी हो सकेगा इस्तेमाल ….

नई दिल्ली। स्पेसक्राफ्ट ने जिक्वॉन सैटेलाइट लांच सेंटर से उड़ान भरी और करीब 800 किमी दूर स्थित मंगोलिया क्षेत्र के एलक्सा लीग स्थित एयरपोर्ट पर लैंड हो गया। चीन एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन (सीएससी) ने इस बारे में वक्तव्य जारी कर जानकारी दी। यह स्पेसक्राफ्ट क्रू और पेलोड्स दोनों को ले जाने में सक्षम है। चीन ने रीयूजेबल स्पेस ट्रांसपोर्टेशन की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। स्पेसन्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने शुक्रवार को पुन: इस्तेमाल में लाए जाने लायक उपकक्षीय वाहन का परीक्षण किया।

हालांकि स्पेस एजेंसी द्वारा इस टेस्ट का कोई वीडियो या तस्वीर जारी नहीं की गई। सिर्फ इतना ही नहीं, फ्लाइट की समयावधि को लेकर भी कोई जानकारी नहीं दी गई है। वहीं इसके लिए किस तरह की ईंधन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है और किस ऊंचाई पर उड़ान भरी गई यह भी नहीं बताया गया है। इंडियाटाइम्स वेबसाइट पर चल रही खबर के मुताबिक स्पेस एजेंसी की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में सिर्फ इतना बताया गया है कि स्पेसक्राफ्ट ने इंटीग्रेटेड एविएशन एंड स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया। इससे संकेत मिलता है  कि इसने वर्टिकल टेकऑफ किया है और इसकी लैंडिंग हॉरिजेंटल हुई होगी।

यह टेस्ट सितंबर 2020 में रीयूजेबल एक्सपेरिमेंटल स्पेसक्राफ्ट की टेस्ट फ्लाइट के ठीक बाद किया गया है। तब भी उड़ान का तरीका इसी तरह का था। रिपोर्ट के मुताबिक उस प्रयोग को रीयूजेबल स्पेस कांसेप्ट की शुरुआत माना गया था। हालांकि उस प्रोटोटाइप की भी कोई तस्वीर सामने नहीं आई थी। अब ताजा उड़ान के बाद चीनी स्पेस कंपनी ने कहा है कि इन दोनों मॉडल्स को एक साथ इस्तेमाल कर पूरी तरह से पुन: इस्तेमाल हो सकने वाला ट्रांसपोर्ट सिस्टम तैयार किया जा सकता है।  चीन ने 2017 में ही दुनिया के सामने इस बात के संकेत दे दिए थे कि वह 2020 में दोबारा इस्तेमाल किए जाने लायक स्पेसक्राफ्ट बनाने की मंशा रखता है। वहीं 2045 तक चीन न्यूक्लियर पावर से चलने वाला शटल बनाने की तैयारी में है।

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