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चहेतों के लिए बदल दिए नियम, बिना टेंडर दिए गए ठेकों में 200 करोड़ का घोटा, आडिट रिपोर्ट से खुला मामला …

लखनऊ। लखनऊ में जनेश्वर मिश्र और जेपी इण्टरनेशनल सेंटर समेत कई परियोजनाओं के निर्माण में बड़ा घपला सामने आया है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में हुए इन घपलों को लेकर ऑडिट विभाग ने प्राधिकरण अफसरों से रिकवरी की भी सिफारिश की है। बिना टेंडर कराए ठेकेदारों, कम्पनियों को काम बांटने के साथ कुछ चहेतों को अधिक भुगतान तो कुछ के लिए निर्धारित नियम ही बदल डाले गए। इसका खुलासा करते हुए स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग ने अपने ऑडिट में करीब 200 करोड़ रुपये के घपले की जानकारी दी है। बताया गया है कि गोमतीनगर विस्तार, कानपुर रोड की योजनाओं में भी गड़बड़ियां की गईं।

जनेश्वर मिश्र पार्क वर्ष 2013 से 2017 के बीच बना था। शासन ने ऑडिट की जिम्मेदारी स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग को सौंपी थी। चार दिन पहले रिपोर्ट एलडीए पहुंची। इस आधार पर प्राधिकरण वित्त नियंत्रक ने 14 जून को जिम्मेदार अफसरों को अधिकारियों को पत्र जारी किया है। ऑडिट विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिस वक्त ये गड़बड़ियां हुई हैं, तब प्राधिकरण उपाध्यक्ष सतेन्द्र यादव थे।

ऑडिट के मुताबिक जेपी सेन्टर के कंसल्टेंट को 3.59 करोड़ रुपए अधिक फीस दी गई। सीजी सिटी में उसे 20 हजार रुपए प्रति एकड़ फीस मिली, जबकि जेपी सेंटर में पूरी परियोजना का डेढ़ प्रतिशत फीस थमा दी गयी। इससे एलडीए को 3.53 करोड़ रुपए नुकसान हुआ।

गोमतीनगर विस्तार-सीजी सिटी में एक बिल्डर ने अपनी टाउनशिप में सड़क बनाने की जिम्मेदारी एलडीए को दी थी। उसने प्राधिकरण में एक करोड़ रुपए जमा किया था। मगर एलडीए ने 4.17 करोड़ की सड़क बना दी। इससे एलडीए को 3.17 करोड़ का नुकसान हुआ।

एलडीए के तत्कालीन इंजीनियरों ने अलीगंज स्थित एलडीए कॉम्प्लेक्स में मरम्मत करवाकर टाइल्स लगाई थी। एलडीए इंजीनियरों ने न लोनिवि का रेट लिया और न जानसन, कजारिया, सोमानी, बेल कम्पनी की टाइल्स का। इसके बजाय दिल्ली शेड्यूल रेट(डीएसआर) से ले लिया। यह देश में सर्वाधिक था। इससे एलडीए को 23.87 लाख का नुकसान हुआ।

एलडीए ने देवपुर पारा योजना में लोहिया आवास योजना शुरू की थी। मकान बनाने का काम एक निजी कंपनी को दिया गया, लेकिन काम शुरू होने से एक साल पहले ही मोबलाइजेशन एडवांस दे दिया गया। इससे एलडीए की रकम एक वर्ष से अधिक समय तक कम्पनी के पास पड़ी रही। इससे निजी कम्पनी को 19.85 करोड़ रुपए ब्याज का लाभ हुआ।

जनेश्वर मिश्र पार्क के लिए छह गोल्फ कार्ट गाड़ियां खरीदी गयी थीं। इनकी खरीद में भी 45.14 लाख रुपए अधिक भुगतान होने की बात ऑडिट रिपोर्ट में कही गई है।

 

  पकड़ी गईं गड़बड़ियां  

जनेश्वर पार्क

  1. बिना टेण्डर लकड़ी की 150 बेंच लगवाने में 42.68 लाख का नुकसान पहुंचाया।
  2. बिना टेण्डर निर्वाण दिवस पर मनाने पर 64 लाख का नुकसान।
  3. झूले और ओपन जिम बनाने में 55.67 लाख का अनियमित भुगतान।
  4. पुण्यतिथि कार्यक्रम के नाम पर 63.15 लाख की अनियमितता।
  5. 207 फुट झंडे के लिए 1.39 करोड़ का अनियमित काम कराया।
  6. पार्क में बिना टेण्डर कराए ही 2.65 करोड़ की वित्तीय अनियमितता।
  7. लोकार्पण समारोह में बिना टेण्डर 1.14 करोड़ रुपए का अनियमित काम।
  8. पार्क के अनुरक्षण के नाम पर 4.72 करोड़ रुपए की अनियमितता
  9. गण्डोला बोट के नाम पर 47.50 लाख रुपये का घोटाला

 

  यहां भी मनमानी  

 

1.लोहिया विधि विश्वविद्यालय में आयोजित यशभारती सम्मान समारोह से 13.90 लाख का अतिरिक्त भार

  1. शान ए अवध के निर्माण में मोबलाइजेशन अग्रिम में 23.94 करोड़ रुपए की अनियमितता

3.जेपी का 615.44 करोड़ का टेण्डर 7.6 प्रतिशत अधिक दर पर मंजूर किया गया।

 

शासन से ऑडिट रिपोर्ट आई है। इसमें तमाम आपत्तियां हैं। भुगतान और घपले की बात कही गयी है। अफसरों को पत्र भेजकर रिपोर्ट मांगी गई है। इंजीनियरिंग से रिपोर्ट आने के बाद इसे कार्रवाई के लिए शासन भेजा जाएगा।

– दीपक सिंह, वित्त नियंत्रक, एलडीए

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