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बिल्ली औऱ जीजी …

बड़ी जीजी अचानक बिन बताए चार सौ किलोमीटर की यात्रा किए आ गईं पिछले शुक्रवार। माँ आवाक तो हुई लेकिन उनके मुरझाए औऱ थके चेहरे को देख सारे प्रश्न दरकिनार कर दिए…

दो दिन में एक विस्मयकारी शांति भंग हुई और दीदी ने माँ को बताया कि उन्हें ओवरी में सिस्ट था जो ग्रेड थर्ड कैंसर में बदल गया है….घर की जिम्मेदारियों में कभी ठीक से ट्रीटमेंट नहीं हो पाया……

सास के ताने अब आदत बन चुके हैं पाँच साल हो गए शादी को गोद न भरी बहू की, गाँव की औरतों से कहती फिरती हैं….ताबीजों, धागों से मेरे गले का मंगलसूत्र तक नहीं दिखता माँ … आए दिन झाड़ फूँक करने ताँत्रिक बुलाती हैं सास… जो मुझे अंदर ही अंदर तोड़ रहा है….

सिसकियों से संवाद कुछ देर ठहर गया माँ ने जीजी को पानी दिया औऱ उनकी पीठ पर हाथ रखे बैठी रहीं देर तक …

जीजी फिर बोली… इनका व्यवहार भी रूखापन लिए हुए है… किसी भी बात का जवाब देना या बात करना उन्हें बोझिल लगता है…..एक लम्बी साँस लेकर दीदी दूसरे कमरे में चली गईं।

माँ पीछे पीछे गई लेकिन फिर वापस आ गईं बिना कुछ कहे… इतने में किचन में रखा दूध बिल्ली गिरा गई… गिरे हुए को उठाना बहुत कठिन होता है मैं सोच ही रही थी.. इतने में माँ ने मुझे दूध समेटने का बोल ही दिया! अपनी जगह से उठना न चाहने के विरुद्ध मैं उठी औऱ किचन की तरफ बढ़ी… बिल्ली जीभ से ज़मीन पर गिरा दूध चाट रही थी मैंने उसके काम में दखल नहीं दिया क्यों कि वो भी मेरा काम आधा निपटा रही थी ।

समय के पर होते हैं.. उड़ते उड़ते जाने कहाँ पहुँच जाता है… एक महीने से ज्यादा हो गए हैं जीजी को घर आए एक भी फोन नहीं आया जीजाजी का खैर खबर लेने… लेकिन जीजी की नजरें मोबाइल औऱ गेट पर ही टिकी रहती हैं… बच्चे पैदा करने की जिम्मेदारी न निभा पाने वाली एक असहाय स्त्री…. उफ्फ मैं ये क्या सोच रही हूँ… डॉ से आपाइनमेंट है जीजी का शायद ऑपरेशन की डेट तय होगी… जीजी बिना कहे ही तैयार होकर आ गईं औऱ माँ बिल्ली से दूध की रखवाली के लिए सतर्क बैठी है….

…..जीजी रिक्शे में बैठ नहीं पा रही थी लोअर बेक, दर्द से टूट रहा था… रिक्शे में चढ़ते ही बोली

गुड्डो लड़कियों को उत्पादनशील ही स्वीकारा जाता है परिवार औऱ समाज में…

रखे दूध को गिराने वाली बिल्ली अशुभ मानी जाती है

लेकिन बच्चे पैदा न करने वाली स्त्री अशुभ के साथ डायन भी मानी जाती है…. हॉस्पिटल आ गया जीजी आराम से उतरिए बोलकर मैंने एक अशुभ बात पर ताबीज़ बाँध दिया…

 

©दीप्ति पाण्डेय, भोपाल, मध्यप्रदेश         

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