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ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कहा- सकारात्मक विचारों का ओवरडोज़ वर्तमान समय की आवश्यकता …

बिलासपुर। हमारे निकट के संबंधों में विपत्ति आना, स्वास्थ्य बिगड़ने की स्थिति में भावनात्मक होने के कारण भय, घबराहट, आंसू, दर्द का आना आज के समय में स्वाभाविक हो गया है। ऐसे समय में सकारात्मक विचारों ओवरडोज़़ लेना जरूरी है क्योंकि भय, घबराहट आदि एक तरह से नकारात्मक भावनाएं हैं जिसका असर स्वयं पर व अपने परिजनों पर बहुत बुरा पड़ता है। मन को सकारात्मक व शक्तिशाली विचारों में इतना व्यस्त रखें कि किसी भी प्रकार के नुकसान पहुंचाने वाले विचारों के लिए स्थान न रहे। इसके लिए सुबह-सुबह न्यूज़ चैनल, अखबार, सोशल मीडिया से न जुड़कर अपना समय आसन-प्राणायाम, सत्संग, अच्छे चिंतन वाले पुस्तक व मेडिटेशन करने में दें। जैसे घर में सामग्रियों का स्टॉक भरपूर रखने का ख्याल रहता ऐसे ही मन में अच्छे विचारों का स्टॉक भी भरपूर रखना जरूरी है।

उक्त बातें बिलासपुर लेडिज़ सर्कल व बिलासपुर राउण्ड टेबल द्वारा ज़ूम मीटिंग पर आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही।

मन को शांत रखें व भगवान को अपना साथी बनाएं…

कार्यक्रम के विषय – ‘‘उम्मीद : शान्ति की शक्ति से कोविड पर विजय’’ पर सभी से बात करते हुए मंजू दीदी जी ने कहा कि मन की शान्ति; सकारात्मक सोच का ही परिणाम है और यही आध्यात्मिकता है। पवित्र ग्रंथ गीता में भी भगवान ने सबसे पहले अर्जुन का विषाद दूर किया। विषाद को आज की भाषा में हम तनाव या अवसाद कह रहे हैं। उसके पश्चात् ही अर्जुन के अंदर युद्ध करने की शक्ति आई। आज के समय में भी हमारा युद्ध व चुनौती यही है कि हम हर हालत में मन को शांत, एकाग्र, शक्तिशाली व सकारात्मक रखें और भगवान को अपना साथी बनाएं क्योंकि जिसका साथी है भगवान, उसे क्या रोकेगा आंधी और तूफान।

भय है 11वां विकार…

काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, घृणा, द्वेष, आलस्य और अलबेलापन – ये दस विकार हैं। ग्यारहवें विकार के रूप में भय आज हमारे सामने इतनी बड़ी समस्या बनकर खड़ा है। यदि हम कोविड के सकारात्मक पहलू पर नजर डालें तो इसने हमें स्वच्छता का पाठ पढ़ा दिया। हम हाथ धोते समय कोरोना के बारे में न सोचकर यह सोचें कि – ‘मैं स्वस्थ आत्मा हूं’। कोरोना-कोरोना कहकर अपने को व वातावरण को पैनिक न करें बल्कि कोरोना की जगह करूणा का भाव मन में जागृत करें अर्थात् सबके प्रति प्यार, मधुरता, रहम व तकलीफमंद के प्रति कुछ करने का भाव हो। सोशल डिस्टेन्सिंग जरूरी है किन्तु घर के सदस्यों की देखभाल के लिए स्पर्श जरूरी है क्योंकि यह बहुत बड़ी चिकित्सा का कार्य करता है क्योंकि हमारी हथेलियों में ऊर्जा के द्वार होते हैं।

लेडिज़ सर्कल की सभी गृहस्थ में रहने वाली महिलाओं का उत्साह वर्धन करते हुए कहा कि कन्या वह जो 21 कुलों का उद्धार करे लेकिन माताएं-बहनें तो अपने दोनों पक्षों- ससुराल व मायके के 21 कुलों का उद्धार करती हैं। वर्तमान स्थिति में यदि घर से बाहर नहीं जा सकते तो कम से कम अपने संपर्क वालों से फोन करके यह कहकर उनका मनोबल व उत्साह तो बढ़ा ही सकते हैं कि हम आपके साथ हैं, ईश्वर आपके साथ है। हमारे हर विचार व वाणी में आशीर्वाद होना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय सिंधु सभा की सचिव ब्रह्माकुमारीज़ की नियमित सदस्य बहन श्रीमति विनीता भावनानी जी ने सभी को आध्यात्म की ओर प्रेरित करते हुए कहा कि मुझे ब्रह्माकुमारीज़ से बहुत सी चीजें सीखने को मिली, मन का सशक्तिकरण हुआ और राजयोग मेडिटेशन से जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन व सफलता मिली। यहां मुझे ईश्वर की समीपता का गहराई से अनुभव हुआ कि स्वयं भगवान आकर दैवीय गुणों को अपनाने की पढ़ाई पढ़ाते हैं। उन्होंने इस आयोजन की बहुत सराहना की।

कार्यक्रम का संचालन बिलासपुर लेडिज़ क्लब की चेयरपर्सन बहन साइना उभरानी जी ने बहुत कुशलता पूर्वक किया। शहर के सौ से अधिक गणमान्य नागरिकों ने इस सत्र का लाभ लिया। सभी पार्टिसिपेन्ट्स ने चैट के माध्यम से कार्यक्रम की प्रशंसा की व आभार प्रकट किया।

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