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मौसम की बेरुखी : चंबल संभाग में बाढ़ से तबाही, लेकिन निमाड़ में सूखे के हालात…

भोपाल। प्रदेश के चंबल संभाग में जहां लगातार हो रही बारिश के कारण आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा रखी है, वहीं निमाड़ अंचल में सूखे के हालात बने हुए हैं। अंचल में अब तक औसत की तुलना में सिर्फ 40% बारिश ही हुई है। परिणामस्वरूप अभी तक क्षेत्र की प्रमुख नदियों ताप्ती, नर्मदा, कुंदा आदि में जहां उफान नहीं आ सका, तो इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर डैम के एक भी गेट नहीं खुल सके। वहीं, कुओं और नलकूपों में भी पानी नहीं आ सका है। मौसम वैज्ञानिकों ने इसका कारण निमाड़ क्षेत्र में सिस्टम नहीं बन पाना बताया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले एक सप्ताह तक यहां बारिश की कोई संभावना भी नजर नहीं आ रही है।

मौसम की इस बेरुखी के कारण किसानों के माथे पर फसलों को लेकर चिंता की लकीरें खिंच रही हैं। पानी की कमी से सोयाबीन की फसल मुरझाकर खराब होने लगी है। यहां के कपास और मिर्च उत्पादक किसान भयभीत हैं, क्योंकि अभी तक जो बारिश हुई थी, उसकी नमी भी खेतों से गायब हो चुकी है। फसलों में खाद व दवाओं का छिड़काव किया जा चुका है। नमी नहीं होने से जमीनी गर्मी के कारण फसलें सूखने की कगार पर हैं। किसान मिट्‌टी में चीरा लगाकर फसल को बचाने की जुगत में लगे हुए हैं। दूसरी ओर शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जलसंकट भी बरकरार है।

बुरहानपुर जिले में अब तक केवल 12.18 इंच बारिश हुई है। जबकि, पिछले साल अब तक 18.59 इंच पानी बरसा था। जिले के बुरहानपुर में 10.51, नेपानगर में 12.39 व खकनार में 13.65 इंच बारिश हुई है। वहीं, बुरहानपुर की तुलना में खंडवा में थोड़ी ज्यादा बारिश हुई है, लेकिन यहां भी औसत की तुलना में केवल 60 प्रतिशत ही है। जिले की औसत बारिश 32 इंच है। 1 जून से अब तक जिले में 15.4 इंच बारिश हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक 18.7 इंच बारिश हुई थी। इस मान से अब तक 3.3 इंच बारिश कम हुई है। इसी तरह के हालात खरगोन और बड़वानी जिले के हैं।

मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जीडी मिश्रा के मुताबिक अभी निमाड़ में मानसून सक्रिय नहीं है। अगले एक सप्ताह तक कोई सिस्टम भी नहीं बन रहा है, जिससे कि बारिश का अनुमान लगाया जा सके। हालांकि, इस बीच छुटपुट बारिश हो सकती है। उन्होंने बताया कि अगस्त के साथ सितंबर तक बारिश होगी, जिससे कि औसत बारिश का कोटा पूरा हो जाएगा। यही हालात मध्यप्रदेश के अधिकांश जिलों के हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग में बना सिस्टम भी लौटने की स्थिति में है।

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