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ब्यूरोक्रेसी पर वार-पलटवार : उमा भारती ने दिग्विजय सिंह को लिखी चिट्ठी, कहा- दादा आपकी सच्ची में लाड़ली बहन…

भोपाल। ब्यूरोक्रेसी को लेकर दिए गए बयान के बाद मध्यप्रदेश के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों में चिट्ठी चल पड़ी है. बयान पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का है और इस पर आपत्ति जताई है दूसरे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने. उमा भारती के ब्यूरोक्रेसी के नेताओं की चप्पल उठाने वाले बयान पर दिग्विजय सिंह ने सवाल खड़े किए तो उमा ने भी उन्हें तल्खी भरे अंदाज में चिट्ठी लिखकर जवाब दिया है.

दिग्विजय सिंह को भेजी चिट्ठी में उमा भारती ने लिखा है… आदरणीय दादा, ब्यूरोक्रेसी पर दिए मेरे बयान पर आपने उचित प्रतिक्रिया दी है. मुझे अपनी ही बोली भाषा का गहरा आघात लगा है. मैं आपके पीछे पड़ जाती थी कि आप संयमित भाषा नहीं बोलते. यह तो बिल्कुल ऐसा हो गया, जैसा रामायण में लिखा है… कर उपदेश कुशल बहुतेरे, सो अचरही ते नर न घनेरे. मैं आगे भाषा सुधार लूंगी, आप भी ऐसा कर सकें तो कर लें. उमा भारती ने खत की आखिरी लाइन में लिखा – आपकी सच्ची में लाड़ली बहन.

 

दिग्विजय ने लिखा था…

उमा, आप मेरी छोटी बहन के नाते मुझे कम बोलने के लिए चेताती रही हैं. लेकिन, आपने नौकरशाहों के ख़िलाफ़ जो अपशब्दों का उपयोग किया है, वे घोर आपत्तिजनक हैं. भारतीय संविधान में ब्योरोक्रेसी नियम और क़ानून के अंतर्गत निष्पक्षता से कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है. वे आपके नौकर नहीं हैं. चप्पल उठाने वाले लोग नहीं हैं. आप केंद्रीय मंत्री रही हैं, मुख्यमंत्री रही हैं. इस प्रकार की टिप्पणी आपको नहीं करना चाहिए. आपको माफ़ी मांगना चाहिए. दिग्विजय सिंह की इस बात पर उमा ने चिट्ठी लिखकर जवाब दिया है.

 

उमा ने कहा था…

उमा भारती का सोमवार को एक वीडियो वायरल हो गया था, उसमें वो कह रही थीं कि ब्यूरोक्रेसी कुछ नहीं होती. चप्पल उठाने वाली होती है ब्यूरोक्रेसी. चप्पल उठाती है हमारी. हमको समझाया जाता है कि आपका बहुत बड़ा चक्कर पड़ जाएगा, ऐसा हो गया तो. क्या लगता है ब्यूरोक्रेसी नेता को घुमाती है. अकेले में बात हो जाती है, फिर ब्यूरोक्रेसी फाइल बनाकर लाती है. मैं 11 साल से मंत्री, मुख्यमंत्री रही. पहले हमसे बात हो जाती है, फिर फाइल प्रोसेस होती है. ब्यूरोक्रेसी की औकात क्या है. हम उन्हें तन्ख्वाह दे रहे, हम उन्हें पोस्टिंग दे रहे, हम प्रमोशन और डिमोशन दे रहे. हम ब्यूरोक्रेसी के बहाने से अपनी राजनीति साधते हैं.

 

उमा ने दी ये सफाई

उमा भारती ने अपने बयान पर बाद में सफाई दी थी कि-हम नेताओं में से कुछ सत्ता में बैठे निकम्मे नेता अपने निकम्मेपन से बचने के लिए ब्यूरोक्रेसी की आड़ ले लेते हैं कि हम तो बहुत अच्छे हैं लेकिन ब्यूरोक्रेसी हमारे अच्छे काम नहीं होने देती. जबकि सच्चाई यह है कि ईमानदार ब्यूरोक्रेसी सत्ता में बैठे हुए मजबूत सच्चे और नेक इरादे वाले नेता का साथ देती है. यही मेरा अनुभव है. मुझे रंज है कि मैंने असंयत भाषा का इस्तेमाल किया जबकि मेरे भाव अच्छे थे. मैंने आज से यह सबक सीखा कि सीमित लोगों के बीच अनौपचारिक बातचीत में भी संयत भाषा का प्रयोग करना चाहिए.

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