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विश्व के सबसे बड़े स्फटिक श्रीयंत्र के दर्शनों का साक्षी बना आगरा …

आगरा। ‘जब भारत भूमि पर सनातन धर्म को बौद्ध धर्म आच्छादित करने लगा, सनातनी पूजा पद्धति का ह्रास होने लगा, देवस्थानों की उपेक्षा होने लगी, तब भगवान शिव स्वयं भगवत्पाद आदि शंकराचार्य रूप लेकर धरा पर अवतरित हुए। धर्म को पुनः मर्यादा के सीमाओं में बांधने, वैदिक धर्म एवं देव स्थानों की पुनर्स्थापना करने के साथ-साथ उन्होंने देश की चार दिशाओं में चार पीठों की स्थापना की तथा अपने शिष्यों का वहां के आचार्य के रूप में अभिषेक किया। आज भी ढाई हजार वर्ष पुरानी गुरु शिष्य परंपरा का निर्वाह करते हुए चार शंकराचार्य भगवत्पाद आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चारों पीठों पर सुशोभित हैं जोकि भारत की परम्पराओं और संस्कृति के संरक्षक हैं।’ भारत की प्राचीन गुरु-शिष्य परम्परा की प्रशंसा का महत्व बताते हुए ये प्रवचन जोशीमठ उत्तराखंड से पधारे ब्रह्मचारी मुकुंदानंदजी ने श्रीगोपालजी धाम, दयालबाग में दिए।

अनंतश्री विभूषित ज्योतिष्पीठ एवं द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज एवं स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती के ये शिष्य स्वल्प प्रवास पर आगरा आए थे। प्रवचन देते हुए ब्रह्मचारी मुकुंदानंद ने कहा कि आज से 15 वर्ष पूर्व मध्य प्रदेश के परमहंसी गंगा आश्रम में जगतगुरु शंकराचार्य ने स्फटिक शिला पर विश्व का सबसे बड़ा स्फटिक श्रीयंत्र बनवाया था। अब इसे जोशीमठ, उत्तराखंड भेजा जा रहा है। लगभग 500 किलो वजन का यह श्रीयंत्र जोशीमठ के पास श्रीनगर नामक स्थान पर स्थापित होगा जहां भगवतपाद आदि शंकराचार्य ने तपस्या की थी।

श्रीयंत्र के आगरा आगमन की सूचना मिलते ही लोग इसे देखने तथा पूजन करने के लिए गोपाल धाम, दयालबाग पर एकत्र हो गए। इस दिव्य शक्ति यंत्र के दर्शन करने के बाद सभी भक्तों ने जमकर फूलों की होली खेली। ब्रह्मचारी मुकुंदानंद ने भी भक्तों पर पुष्प वर्षा कर आशीर्वाद दिया।

डा.दीपिका उपाध्याय ने बताया कि स्फटिक शिला पर बनाया गया यह विश्व का सबसे विशाल एवं दुर्लभतम श्रीयंत्र है। जोशीमठ के पुजारी शिवानंद उनियाल ने श्रीयंत्र की पूजा करवाई। वहीं से पधारे विवेक चौबे ने जो भजन कीर्तन प्रारंभ किया तो सभी भक्त घंटों भक्ति रस में झूमते रहे।

इस कार्यक्रम का आयोजन गुरुदीपिका योगक्षेम फाउण्डेशन की ओर से किया गया। फाउंडेशन के निदेशक रवि शर्मा ने बताया कि फूलों की होली खेलकर पर्यावरण रक्षा का संदेश दिया जा रहा है तथा नीति प्रवचनों के माध्यम से समाज को अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है। आगे भी इस प्रकार के आयोजनों की योजना है जिससे समाज को सही दिशा दी जा सके।

इस अवसर पर रणजी खिलाड़ी साहिल पुरी, दिनेश शर्मा, देवेंद्र गोयल, अखिलेश शर्मा, विशाल शर्मा, मोहन गोयल, ओपी शर्मा, पी सी गर्ग, सचिन गुप्ता, राजा बाबू, कांता शर्मा, डॉ रश्मि शर्मा, वीणा कालरा, पूजा गुप्ता, स्वाति गुप्ता, वरदान, निष्ठा, माधव, धीरज, गौरव, मोनू, प्रियांशी, अनिका, प्रांशु आदि उपस्थित रहे। भक्तों के दर्शन पूजन के उपरांत यह दिव्य श्रीयंत्र ब्रह्मचारी मुकुंदानंद की देखरेख में जोशीमठ के लिए रवाना हो गया।

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