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बापूजी के तिरस्कार के बाद अब अनुपमा बा को सिखाएगी सबक…

नई दिल्ली। बा ने बापूजी के मान-सम्मान के बारे में न सोचते हुए पूरे परिवार के सामने उनको खूब खरी-खोटी सुनाई है। जो अनुपमा के लिए बर्दाश्त से बाहर हो गया है। बा ने अनुपमा के चरित्र पर उंगली उठाई, वहीं अनुज को कहा कि वह अनुपमा की मांग में सिंदूर भर कर अपने रिश्ते को नाम दे दे। लेकिन अनुज ने भी बा को करारा जवाब दिया जिसके बाद बा का मुंह छोटा हो गया।

लेकिन इस बात का सारा गुस्सा बापूजी पर निकाल गया। लीला ने बापूजी को निशाना बनाया क्योंकि बा को पता है कि अनुपमा की जान बापूजी में बसती है। ऐसे में अंजाने में लीला ने अपने पति को खूब खरी-खोटी सुना दी। लीला ने बापूजी को कहाकि उनकी वजह से ही आज ये दिन उन्हें देखना पड़ रहा है, और उनकी बहू किसी पराए मर्द के साथ है।

जब बापूजी अपनी बेटी समान अनुपमा बहू के लिए ये नहीं सुन पाते तो वो इस बात का विरोध करते हैं। ऐसे में लीला चंडी बन जाती है और चिल्लाते हुए कहती है कि आज से आप कुछ नहीं बोलेंगे क्योंकि आप बोलने लायक नहीं है। अब वो होगा जो मैं कहूंगी और आप सिर्फ सिर हिलाएंगे और हां कहेंगे।

ये सब सुन कर बापूजी बुर तरह से टूट जाते हैं और जमीन पर गिर पड़ते हैं। इधर, गुस्से में लीला कारखाने में लगे दीप तहस-नहस कर देती है। दीप अनुपमा ने जलाए थे ऐसे में कारखाने मेंजाकर लीला तोड़फोड़ करना शुरू कर देती है।

अब बापूजी सिर नहीं उठा पा रहे, ऐसे में अनुपमा उन्हें अपना सहारा देती है और अपने घर लाने का फैसला करती है। वह बापूजी को अपने घऱ ले जाती है और आराम करने के लिए बिस्तर पर लेटा देती है। बापूजी को जैसे ही अनुपमा चादर ओढ़ाती है, बापूजी नींद में बोलते हैं कि ‘मैं किसी काम का नहीं। मैं किसी काम का नहीं।’

ये सुनते ही अनुपमा को अहसास होता है कि बापूजी के आत्मसम्मान को गहरा धक्का लगा है। उन्हें कैसे इस से उबारा जाए? ये सोचते ही अनुपमा रो पड़ती है और दौड़कर कमरे से बाहर जाती है। तभी अनुज वहां आ जाता है और अनुपमा को संभालता है। वह अनुपमा का हौंसला बढ़ाता है और कहता है कि तुम बापूजी के साथ हो तो सब ठीक होगा

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