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डेंगू के मामले बढ़ते ही नींद से जागी प्रशासन, पूरे शहर में फॉगिंग करने दिया आदेश…

रेवाड़ी। रेवाड़ी में डेंगू के मामले बढ़ते ही प्रशासन की नींद खुली। आंकड़ा सौ के पार होते ही पूरे शहर में फॉगिंग करने का आदेश जारी कर दिया।। 34 नए केस के साथ डेंगू के कन्फर्म केसों का आंकड़ा 100 के पार पहुंच चुका है। ये सरकारी रिकॉर्ड का आंकड़ा है, जबकि हकीकत यह है कि प्राइवेट अस्पतालों में बेड फुल हो चुके हैं। हालात बिगड़ते देखकर DC यशेन्द्र सिंह ने अधिकारियों को इससे निपटने के लिए सख्त आदेश दिए हैं।

2 दिन के अंदर पूरे शहर के अलावा गांवों में भी फॉगिंग करने के निर्देश दिए हैं। डीसी के आदेश के बाद शनिवार सुबह नगर परिषद की 2 टीमें शहर में निकली और कई गली-मोहल्लों में फॉगिंग की गई है। दरअसल, डेंगू ने पिछले कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। रेवाड़ी में 5 दिन पहले तक सरकारी रिकॉर्ड में सिर्फ 56 केस कन्फर्म थे, जो शनिवार सुबह तक 113 हो गए। शुक्रवार की शाम ही 34 नए केस मिले हैं। यह एक दिन में सबसे ज्यादा केस हैं।

बता दें कि रेवाड़ी में सितंबर माह में डेंगू के केस आने लगे थे। शुरुआत में दो-तीन केस मिल रहे थे। लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे केस बढ़ते चले गए। डेंगू के फैलाव को रोकने के लिए डीसी की तरफ से लगातार आदेश दिए गए, लेकिन उनके आदेशों पर अमल करने की बजाए अधिकारी चैन की नींद सोते रहे और अब हालात यह हैं कि सरकारी अस्पताल ही नहीं, बल्कि निजी अस्पतालों में भी मरीजों से बेड फुल हैं।​​​​​

डीसी यशेन्द्र सिंह ने डेंगू की रोकथाम को लेकर बड़ी बैठक की है। डीसी ने सख्त आदेश दिए कि 2 दिन के भीतर पूरे शहर में ही नहीं, बल्कि पंचायतों के सहयोग से गांवों में भी फॉगिंग कराए। डीसी ने कहा कि डेंगू की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग, पंचायत विभाग व नगर परिषद मिलकर काम करें। फॉगिंग के साथ-साथ सफाई कराएं। नगर परिषद व पालिका क्षेत्र में कर्मचारी गमलों, टायर में खड़े पानी की साफ-सफाई का कार्य करें। सुबह-शाम पार्क व रिहायशी क्षेत्र में फॉगिंग कराएं, जिससे डेंगू का मच्छर न पनपे।

सितंबर की शुरुआत में स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू की रोकथाम को लेकर व्यापक इंतजाम करने का दम भरा था। इसके साथ ही ट्रॉमा सेंटर व नागरिक अस्पताल में डेंगू के मरीजों के लिए अलग से वार्ड भी बनाए, लेकिन हालात यह हैं कि बेड पर्याप्त नहीं हैं। मरीजों की संख्या हर दिन बढ़ रही है। गंभीर मरीजों का सरकारी स्तर पर इलाज संभव नहीं है, जिसकी वजह से यहां से सिर्फ रेफर करने का ही काम किया जा रहा है।

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