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नगर निगम के लेखाधिकारी पर भ्रष्टाचार और अनियमितता का आरोप, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर जांच शुरु

कोरबा (गेंदलाल शुक्ल) । नगर पालिक निगम कोरबा के मुख्य लेखा अधिकारी पी.आर.मिश्रा पर भ्रष्टाचार और अनियमितता का आरोप लगा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर नगरीय प्रशासन विभाग ने आरोपों की जांच प्रारंभ कर दी है।

संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास बिलासपुर ने पत्र क्र मांक 335/ शिका./संचा./09/2020 दिनांक-09 जून 20 के माध्यम से शिकायत की बिन्दुवार जांच का निर्देश दिया है। दरअसल नगर निगम के मुख्य लेखा अधिकारी पी.आर.मिश्रा और उनके कथित रिश्तेदार पर निविदाओं में भ्रष्टाचार तथा अनियमितता का आरोप लगाया गया है। नगर निगम के वार्ड क्रमांक-55 बल्गीखार में नाली निर्माण कार्य में मेसर्स बालाजी एसोसिएट को दिया गया। इस फर्म में पंकज गौतम पार्टनर हैं, जो मुख्य लेखा अधिकारी पी.आर.मिश्रा के बहनोई बताये गये हैं। फर्म की ओर से सभी कानूनी कार्यवाई और पत्राचार पंकज गौतम की ओर से ही किया जाता है। आरोप है कि उक्त निविदा में पंकज गौतम, पी.आर.मिश्रा और अन्य अधिकारियों ने मिलकर अनियमितता और भ्रष्टाचार किया है।

मुख्यमंत्री से की गयी शिकायत में बताया गया है कि निविदा के साथ ठेकेदार ने शपथ पत्र देकर असत्य घोषणा की है, कि नगर निगम में उनका कोई निकट रिश्तेदार कार्यरत नहीं है। एन.आई.टी.की कंडिका 3.10 का यह उल्लंघन और दण्डनीय अपराध है। आरोप है कि पंकज गौतम ने निविदा प्राप्त करने के लिए गलत दस्तावेज प्रस्तुत किये। दस्तावेजों के अनुसार पंकज गौतम फर्म के पंजीयन में बालाजी एसोसिएट के प्रोपाईटर हैं। परन्तु शपथ पत्र और अन्य दस्तावेजों में उन्हें पार्टनर बताया गया है। उनके द्वारा पार्टनरशिप डीड भी जमा की गयी है। अनुबंध शर्तों की कंडिका 26 के अनुसार फर्म के संविधान में परिवर्तन होने पर ठेकेदार द्वारा आयुक्त को सूचित कर फर्म का नया पंजीयन कराना चाहिये था। फ र्म का पी.डब्ल्यू.डी.पंजीयन 2014 में होने के बाद 2015 में अन्य लोगों को पार्टनर बनाया गया। परन्तु इस बदलाव की जानकारी पी.डब्ल्यू.डी.और अन्य विभागों को नहीं दी गयी और पुराने पंजीयन का ही उपयोग किया गया।

मुख्य लेखाधिकारी पी.आर.मिश्रा नगर निगम के निविदा समिति के भी सदस्य है। नगर निगम के अन्य अधिकारी पी.आर.मिश्रा और पंकज गौतम के रिश्ते से वाकिफ हैं। ऐसे में पी.आर.मिश्रा ने अपने पद और प्रभाव का दुरूपयोग कर उक्त निविदा को अपने रिश्तेदार को दिलाया, इसे नकारा नहीं जा सकता। आरोप है कि निविदा स्वीकृति से लेकर निशुल्क समय वृद्धि तक में ठेकेदार को लाभ पहुंचाया गया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शिकायत गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिये हैं। फिलहाल मामले की जांच में सामने आने वाले निष्कर्ष की प्रतीक्षा है।

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