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होली के विविध रंगों से 31 कवि- कवयित्रियों ने रंगा अंतरराष्ट्रीय महिला काव्य मंच ….

अंतरराष्ट्रीय महिला काव्य मंच तमिलनाडु इकाई का वार्षिक कवि सम्मेलन बहुत ही हर्षोल्लास के साथ संस्था के संस्थापक  नरेश नाज़ के सान्निध्य में शनिवार 19 मार्च 2022 3:00 बजे से  प्रारंभ हुआ.. और बहुत ही सौहार्दपूर्ण वातावरण में डिजिटल के माध्यम से संपन्न हुआ। गोष्ठी की अध्यक्षता राजस्थान इकाई से डॉ. सुमन सखी दहिया, वैश्विक सलाहकार ने की, मुख्य अतिथि थी दक्षिण प्रांत की, सचिव डॉ. मंजु रुस्तगी, स्वागत भाषण सरला ‘सरल’ एवं सरस्वती वंदना रेखा सुमन ने प्रस्तुत की। मंच संचालन शोभा चोरड़िया एवं सीमा प्रताप ने किया। अंत में चेन्नई इकाई की अध्यक्ष रेखा राय ने धन्यवाद ज्ञापन देकर गोष्ठी का समापन किया।

प्रतिभागी कवि- कवयित्रियाँ एवं उनकी कविता की पंक्तियाँ इस प्रकार हैं-  नरेश नाज़ ने ” पूछो न यह कैसी रही इस साल की होली, आँखों में अश्क भर गई इस बार की होली”, डॉ. सुमन सखी दहिया ने “तेरे दिल का आहलाद है होली, मेरे मन का प्रहलाद है होली”, डॉ. मंजु रुस्तगी ने ” प्रेम सार संबंधों का प्रेम विलक्षण भाव, प्रेम है पावन भावना प्रेम समर्पण त्याग”, डा. पी. लता ने “रंगीन हल्के दलों वाले फूल कितने नाजुक सुंदर सुरभित, इन्हीं गुणों हेतु कितने प्रिय हैं हमें फूल”, डॉ . विद्या शर्मा ने “फगुआ के गीत गूंजे बाजे शहनाई रे, जंगल से टेसू टेरे, आई होली आई रे”, डॉ. प्रनव भारती ने “जिंदगी झोंका हवा का प्यार का संगीत है, जिंदगी खुशियों की महफिल गा सकें तो गीत है”, प्रो. के. सती ने “नारी तू पहचान ले अपनी शक्ति को, शक्ति बिना शिव भी शव है”, डॉ. तंकमणी अम्मा ने ” हम सब इंतजार में हैं स्वस्थ सुखी अच्छे दिन अब आने को हैं”, डॉ.  कुमुद बाला ने “ये कैसी होली खेल रहे हैं अपनी ही सरहदों से, हटकर जो जंग छेड़ रहे हैं”, रंजीता ठाकुर ने “राधा की होली”,  रुक्मण लड्ढा ने “यह ख्यालों की मेरी दुनिया कितनी छोटी सही, है मगर सबसे जुदा और कुछ अनोखी वही”,  रेखा सुमन ने “पति के हाथ की चाय”, अनीता सोनी ने “आयो फागुन मास सखी छायो बसंत है चहुँ दिसी”,  डॉ सुमन सेंगर ने “आज होली का त्योहार आया रंगों की बौछार लाया खुशियों की परवाने लाया”, सरला सिंह ‘सरल’ ने “चलो इस बार कुछ ऐसे होली मनाएँ , दिल में उग रही नफरत की जड़ें मिटाएँ “, शोभा चोरड़िया ने “मन की गागर प्रेम रंग भर, आज हम होली मनाएँ”, रेखा राय ने ” आज बृज में होली है रसिया”, उषा टिबड़ेवाल ‘विद्या’ ने ” आ रंग दूँ मेरे प्यार में होली आई रे गोरी”, डॉ. मिथिलेश सिंह ने ” होली के त्योहार ने आज सबके भीतर उत्साह भरा”,डॉ.सुजाता गुप्ता ने ” रंग बिरंगी होली”, डॉ राजलक्ष्मी कृष्णन ने “नी रंगा एन्निल पुकलेदु, अम्ब  निखिल जगन्नाथन मार्बबिलउरै दिरू”, सीमा प्रताप ने “कक्षा के द्वार के बाहर बैठी एक चिरैया आकर, बोली मुझको पढ़ना है कठिन पहाड़ चढ़ना है”, डॉ अर्चना पाण्डेय ने “हर रंग निराला है गालों पर सजता, नीला या काला है, यह मन रंग जाता है प्रीत की चादर से जीवन रंग जाता है”, ममता सिंह अमृत ने “होश जब तक जिंदगी में जश्न होना चाहिए, खुशियाँ बन जाएँ राधिका मन कृष्ण होना चाहिए”, डॉ सुनीता जाजोदिया ने “रिश्तों की सर्द जमीं पर, कुनकुनी धूप बनकर उतरना”, स्वीटी सिंघल ने “वक्त के साथ बदलता है सब कुछ, नारी का स्वरूप भी बहुत बदला है”, नलिनी कृष्णा ने “दर्द बयाँ कर गए अपने ही अंदाज”, संगीता दरक ‘माहेश्वरी’ ने “यह जीवन है”, कंचन अपराजिता ने “होली के दिन राधा करे ठिठोली” रेखा चौहान एवं दीपमाला महेश्वरी ने भी अपनी प्रस्तुति दी।

कुल मिलाकर 31 कवि- कवयित्रियों ने काव्य रंग में लिपटे होली के रंग बिखेरे।

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